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RBI ने Repo Rate को 5.50 % पर स्थिर रखा – आपकी Loan EMI पर कोई असर नहीं

RBI Recruitment

RBI ने Repo Rate को 5.50 % पर स्थिर रखा – आपकी Loan EMI पर कोई असर नहीं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 6 अगस्त को रेपो रेट को 5.5% पर स्थिर रखने का निर्णय लिया।

 

गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। कम महंगाई और वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए यह कदम उठाया गया।

 भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद रेपो दर को 5.5% पर स्थिर रखने का फैसला लिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर टैरिफ (शुल्क) बढ़ाने की लगातार धमकी दे रहे हैं, जिससे वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में अस्थिरता आ गई है। ऐसे यह फैसला बहुत ही महत्वपूर्ण है।

गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में तीन दिन चली MPC बैठक 6 अगस्त को समाप्त हुई। विश्लेषकों के बीच अनुमान था कि आरबीआई अंतिम बार 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर सकता है, लेकिन समिति ने दरों को स्थिर रखने को प्राथमिकता दी।

रेपो रेट पहले ही 5.5% तक आ चुकी है

फरवरी, अप्रैल और जून 2025 में RBI ने तीन बार लगातार रेपो रेट में कटौती की थी, जिससे यह घटकर 5.5% पर आ गई। नीति रुख को ‘उदार’ (accommodative) से ‘तटस्थ’ (neutral) कर दिया था। जून 2025 की समीक्षा बैठक में रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट और कैश रिजर्व रेशियो (CRR) में 100 बेसिस पॉइंट की कटौती ने बाजार में मजबूती का संकेत दिया था।

महंगाई में राहत बनी हुई है

RBI का खुदरा मुद्रास्फीति (रेटेल इनफ्लेशन) लक्ष्य 4% है, जिसमें ±2% का उतार-चढ़ाव स्वीकार्य है। मौजूदा समय में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति छह साल के न्यूनतम स्तर पर है, जिससे भविष्य में दरों में कटौती की गुंजाइश बनी हुई है। जून 2025 की बैठक में RBI ने FY26 के लिए महंगाई अनुमान को घटाकर 3.7% कर दिया, जो हाल के सालों में सबसे कम है।

MPC में कौन-कौन हैं शामिल

  • संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति में डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता, कार्यकारी निदेशक राजीव रंजन और तीन बाहरी सदस्य नागेश कुमार, सौगत भट्टाचार्य और राम सिंह शामिल हैं। यह गवर्नर मल्होत्रा का चौथा रेपो रेट निर्णय है।
  • इस निर्णय से संकेत मिलता है कि RBI वर्तमान वैश्विक और घरेलू स्थितियों को देखते हुए सतर्क रुख अपनाए हुए है। फिलहाल मौद्रिक नीतियों में स्थिरता बनाए रखने के पक्ष में है।
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