20 दिनों के ब्रेक के बाद भारत लौटे राहुल गांधी: सामने खड़ी हैं 3 बड़ी चुनौतियां; आज खरगे से करेंगे मुलाकात
20 दिनों के ब्रेक के बाद भारत लौटे राहुल गांधी: सामने खड़ी हैं 3 बड़ी चुनौतियां; आज खरगे से करेंगे मुलाकात
20 दिनों के ब्रेक के बाद भारत लौटे राहुल गांधी: सामने खड़ी हैं 3 बड़ी चुनौतियां; आज खरगे से करेंगे मुलाकात
नई दिल्ली: करीब तीन हफ्तों (20 दिन) के विदेशी दौरे के बाद कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सोमवार को भारत लौट आए हैं। हालांकि कांग्रेस पार्टी ने उनकी इस यात्रा को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की, लेकिन पार्टी सूत्रों के अनुसार वे यूरोप के दौरे पर थे। हमेशा की तरह भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राहुल गांधी की इस विदेश यात्रा पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। लेकिन इस वक्त देश की सियासत में असली सवाल राहुल की छुट्टी नहीं, बल्कि वतन वापसी के बाद उनके सामने मुंह बाए खड़ी 3 बड़ी राजनीतिक चुनौतियां हैं।
देश लौटते ही राहुल गांधी को तीन प्रमुख मोर्चों पर कड़े फैसले लेने होंगे, जो आने वाले समय में कांग्रेस की राजनीति की दशा और दिशा तय करेंगे। इसी सिलसिले में राहुल गांधी आज (मंगलवार) सुबह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात करेंगे, जिसमें इन चुनौतियों पर विस्तृत रणनीति तैयार की जाएगी।
चुनौती 1: चुनावी राज्यों में कांग्रेस की आपसी सिरफुटव्वल
देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, लेकिन चुनावी रण में उतरने से पहले कांग्रेस को अपने ही घर की कलह से निपटना होगा। विशेष रूप से तीन राज्यों में अंदरूनी खींचतान चरम पर है:
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पंजाब में भारी कलह: पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी समेत कई वरिष्ठ नेता वर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को हटाने की मांग पर अड़े हैं। हालांकि पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल नेतृत्व परिवर्तन से साफ इनकार कर रहे हैं, लेकिन अंदरूनी जंग थमती नहीं दिख रही। अब देखना यह है कि राहुल गांधी इस गुटबाजी को कैसे शांत करते हैं।
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उत्तर प्रदेश में गठबंधन और संगठन का पेंच: समाजवादी पार्टी (SP) के साथ सीट बंटवारे को लेकर बातचीत अभी शुरू भी नहीं हुई है, लेकिन कांग्रेस सांसद इमरान मसूद लगातार अखिलेश यादव पर हमलावर हैं। चर्चा है कि यूपी कांग्रेस में जल्द ही बड़ा संगठनात्मक फेरबदल हो सकता है।
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गोवा में नाराजगी: हाल ही में गिरीश चोडणकर को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद पूर्व अध्यक्ष अमित पाटकर की नाराजगी की खबरें सामने आ रही हैं।
चुनौती 2: ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को धार देना
युवाओं और रोजगार के मुद्दे पर सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस ने जो अभियान शुरू किया था, उसे अब राहुल गांधी की अगुवाई में नई रफ्तार दी जाएगी।
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17 जुलाई को देहरादून में संवाद: राहुल गांधी 17 जुलाई को उत्तराखंड के देहरादून में ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत युवाओं और छात्रों से सीधा संवाद करेंगे। यह अभियान मुख्य रूप से पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दों पर केंद्रित है।
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9 अगस्त को दिल्ली में महारैली: 17 जून को राजस्थान के कोटा से शुरू हुए इस अभियान को आगे बढ़ाते हुए देश के कई शहरों में कार्यक्रम किए जाएंगे। इसके बाद 9 अगस्त को देश की राजधानी दिल्ली में एक बड़ी राष्ट्रीय रैली आयोजित करने की तैयारी है।
चुनौती 3: मानसून सत्र में विपक्ष की एकजुटता और नेता प्रतिपक्ष की परीक्षा
20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद राहुल गांधी के लिए यह पहला सबसे अहम सत्र होगा, जहां विपक्ष कई बड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है:
विपक्ष के तरकश के तीर:
इस सत्र में विपक्ष मुख्य रूप से देशव्यापी पेपर लीक मामले, राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी और एथनॉल युक्त पेट्रोल जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेगा।
संविधान और परिसीमन का बड़ा मोर्चा:
दूसरी तरफ, बीजेपी अपने सहयोगियों का कुनबा बढ़ाने में जुटी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि सत्ता पक्ष संसद में दो-तिहाई समर्थन जुटाने में कामयाब रहा, तो सरकार परिसीमन (Delimitation), महिला आरक्षण का क्रियान्वयन और ‘एक देश, एक चुनाव’ (One Nation, One Election) जैसे बड़े संवैधानिक विधेयकों को आगे बढ़ा सकती है। ऐसे में राहुल गांधी के कंधों पर न सिर्फ सरकार पर हमला बोलने की, बल्कि पूरे विपक्ष (I.N.D.I.A. गठबंधन) को एकजुट रखने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।








