डाक कर्मचारियों का हल्ला बोल: निजीकरण और टारगेट के दबाव के खिलाफ 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल; 20 जुलाई से काली पट्टी बांधकर विरोध
डाक कर्मचारियों का हल्ला बोल: निजीकरण और टारगेट के दबाव के खिलाफ 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल; 20 जुलाई से काली पट्टी बांधकर विरोध
डाक कर्मचारियों का हल्ला बोल: निजीकरण और टारगेट के दबाव के खिलाफ 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल; 20 जुलाई से काली पट्टी बांधकर विरोध
भोपाल: मध्य प्रदेश के डाक कर्मचारियों ने विभाग की नीतियों और बढ़ते काम के दबाव के खिलाफ बड़े आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है. भारतीय डाक कर्मचारी संघ (ग्रुप-सी), मध्यप्रदेश परिमंडल ने एलान किया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो राज्यभर के डाककर्मी 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे. डाक कर्मचारियों का हल्ला बोल: निजीकरण और टारगेट के दबाव के खिलाफ 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल; 20 जुलाई से काली पट्टी बांधकर विरोध
मानसिक और आर्थिक शोषण का आरोप: क्या हैं मुख्य कारण?
संघ के पदाधिकारियों ने विभागीय नीतियों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है:
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निजीकरण का विरोध: डाक विभाग के कथित निजीकरण की कोशिशों पर कर्मचारी संघ ने कड़ा ऐतराज जताया है.
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टार्गेट का भारी दबाव: संघ का आरोप है कि डाककर्मियों से उनके मूल (पारंपरिक) कार्यों के बजाय बैंक खाते खुलवाने, बीमा (Insurance) करने और अन्य वित्तीय योजनाओं के व्यावसायिक टारगेट पूरे करने का अनुचित दबाव बनाया जा रहा है.
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शोषण के खिलाफ आवाज: संगठन का कहना है कि इन अव्यावहारिक लक्ष्यों के कारण कर्मचारियों का मानसिक और आर्थिक शोषण हो रहा है.
चार चरणों में होगा आंदोलन: पहले चरण का शेड्यूल जारी
परिमंडल सचिव रवि कुमार साहू ने बताया कि यह आंदोलन कुल चार चरणों में चलाया जाएगा, ताकि सरकार तक उनकी आवाज पुरजोर तरीके से पहुंच सके:
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पहला चरण (20 से 27 जुलाई): इस दौरान मध्य प्रदेश के सभी डाकघरों और रेल डाक सेवा (RMS) कार्यालयों के कर्मचारी हाथों पर काली पट्टी बांधकर काम करेंगे और अपना शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराएंगे.
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अंतिम चरण (18 अगस्त से): यदि शुरुआती चरणों के विरोध के बाद भी सरकार और प्रशासन ने सुध नहीं ली, तो 18 अगस्त से पूरी तरह से कामकाज ठप कर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी.
संभावित असर:
यदि यह हड़ताल होती है, तो रक्षाबंधन (जो कि इसी महीने के अंत में है) से ठीक पहले डाक, रजिस्ट्री और पार्सल सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं, जिससे आम जनता की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.








