पर्यावरण दिवस के परिप्रेक्ष्य में साहित्य विमर्ष परिषद की काव्य संध्या

पर्यावरण दिवस के परिप्रेक्ष्य में साहित्य विमर्ष परिषद की काव्य संध्या

कटनी l साहित्य जगत कि अग्रणी संस्था साहित्य विमर्ष परिषद के तत्वाधान में काव्य संध्या का आयोजन श्री आनंद तिवारी कि अध्यक्षता, मुकेश चंदेरिया के मुख्य आतिथ्य एवं सतीश अग्रवाल तथा अनिल मिश्रा के विशिष्ट आतिथ्य में शानू राज बेखौफ के कुशल संचालन में संपन्न हुई l

इस अवसर पर पुष्पा प्रांजलि, आनंद अकेला, नित्यानंद पाठक, सचिन मिश्रा, ध्रुव यादव ने अपनी काव्य रचनाओं कि प्रस्तुति से सराहना अर्जित की l

आनंद तिवारी ने एक पेड़ संजीवनी एक पेड़ हैं प्राण, पर्यावरण संवारिये मिले दुखों से त्राण l पढ़कर वाहवाही प्राप्त की l मुकेश चंदेरिया ने अपनी रचना के माध्यम से कहा वृक्ष जड़ों ने इस धरती को दृढ़ आधार दिया हैं, शेषनाग के फण पर भी बेहद उपकार किया हैं l

इसी क्रम में पुष्पा गुप्ता प्रांजलि ने काट दिये सब वन पलाश के कर सेमल का अंत, खोज रहा मरुथल में मानव फिर से ललित बसंत सुनकर सराहना अर्जित की l

शानू राज बेखौफ ने पड़ा देखते ही प्यार हो गया, दिल किरायेदार हो गया l आनंद अकेला ने अब प्रेम के प्याले में जहर पी रहा हूँ में, सचिन मिश्रा ने जाने दो इन्हे राहों में कोई कम न लेना, नित्यानंद पाठक ने ऐसी वैसी पग डंडी पर चल लेते हैं संग तुम्हारे, ध्रुव यादव ने इतने करीब आके भला पलटता हैं कौन पढ़कर गोष्टी को ऊंचाई प्रदान की
स्मृति चिन्ह प्रदान कर काव्य संध्या का समापन हुआ l

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