Pitru Paksha 2026: श्राद्ध और तर्पण में क्यों किया जाता है काले तिल का इस्तेमाल? जानिए इसका धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व
धर्म एवं अध्यात्म: पितृपक्ष (Pitru Paksha) पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और उन्हें याद करने का पवित्र समय माना जाता है। इस दौरान पितरों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। इन अनुष्ठानों में काले तिल (Black Sesame Seeds) का उपयोग अनिवार्य और अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। तर्पण करते समय जल में काले तिल मिलाने और पितरों को अर्पित करने के पीछे पौराणिक मान्यताओं और ज्योतिषीय कारणों का गहरा महत्व है।
1. भगवान विष्णु से उत्पत्ति और पवित्रता
सनातन धर्म की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, काले तिल की उत्पत्ति भगवान श्री हरि विष्णु के पसीने से हुई है।
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इसी कारण तिल को अत्यंत पवित्र और देवतुल्य माना गया है।
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तर्पण में काले तिल का प्रयोग करने से पितरों को अतिशीघ्र तृप्ति मिलती है और भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है।
2. नकारात्मक शक्तियों एवं बाधाओं से सुरक्षा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काले तिल में नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने की शक्ति होती है:
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श्राद्ध और तर्पण के समय जल में काले तिल मिलाने से पितृ कर्म में आने वाली सभी प्रकार की अदृश्य बाधाएं दूर होती हैं।
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यह अनुष्ठान को पवित्र और शांतिपूर्वक संपन्न कराने में मदद करता है।
3. शनि, राहु और केतु के अशुभ प्रभावों से मुक्ति
ज्योतिष शास्त्र में काले तिल का संबंध शनिदेव के साथ-साथ राहु और केतु ग्रह से भी जोड़ा जाता है:
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पितृपक्ष में काले तिल का दान करने और तर्पण में इसका प्रयोग करने से कुंडली में मौजूद शनि दोष, राहू-केतु के अशुभ प्रभाव और पितृ दोष शांत होते हैं।
4. पितरों के देव ‘अर्यमा’ की प्रसन्नता
शास्त्रों में अर्यमा देव को पितरों का अधिपति (देवता) माना गया है:
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ऐसी मान्यता है कि तर्पण के समय तिल अर्पित करने से अर्यमा देव प्रसन्न होते हैं और वे पितरों तक वंशजों द्वारा दिया गया जल और अन्न पहुँचाते हैं।
काले तिल का उपयोग कैसे करें?
पितृ कर्म के दौरान काले तिल का उपयोग निम्नलिखित तरीकों से किया जाता है:
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तर्पण में: तांबे के पात्र में जल, दूध, कुशा और काले तिल मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को अर्घ्य दें।
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हवन/आहुति में: श्राद्ध के हवन के दौरान अग्निदेव को काले तिल की आहुति दी जाती है।
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भोग एवं दान: पितरों के निमित्त काले तिल से बनी मिठाई का भोग लगाएं और जरूरतमंदों को काले तिल का दान करें।

