
कुंडली में पितृदोष: करियर में रुकावट और गृहक्लेश की बड़ी वजह; जानिए कैसे बनता है यह दोष और इससे मुक्ति के अचूक उपाय
आध्यात्मिक डेस्क। सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में पितृदोष को सबसे गंभीर दोषों में से एक माना गया है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृदोष हो, तो उसे जीवन के हर मोड़ पर कड़े संघर्ष का सामना करना पड़ता है। खासकर पारिवारिक जीवन में बिना वजह लड़ाई-झगड़े होना, संतान प्राप्ति में बाधा आना और करियर या बिजनेस के क्षेत्र में लगातार रुकावटें आना पितृदोष के प्रमुख लक्षण हैं।
आइए जानते हैं कि ज्योतिष गणना के अनुसार कुंडली में पितृदोष आखिर बनता कैसे है और इसके बुरे प्रभावों से बचने के लिए कौन से सरल उपाय करने चाहिए। कुंडली में पितृदोष: करियर में रुकावट और गृहक्लेश की बड़ी वजह; जानिए कैसे बनता है यह दोष और इससे मुक्ति के अचूक उपाय
कुंडली में कैसे बनता है पितृदोष?
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को पिता, आत्मा और पूर्वजों (पितरों) का मुख्य कारक ग्रह माना गया है।
- सूर्य पर पाप ग्रहों का प्रभाव: यदि कुंडली में सूर्य की युति (संबंध) राहु, केतु या शनि के साथ हो रही हो, तो इसे ‘पितृदोष’ माना जाता है।
- पंचम और नवम भाव का खेल: यदि कुंडली के पंचम (5वें) और नवम (9वें) भाव में राहु या केतु के साथ सूर्य की युति हो, तो पितृदोष अत्यंत गंभीर और कष्टदायक हो जाता है।
- कमजोर नवम भाव: कुंडली का नवम भाव भाग्य और पूर्वजों का होता है। यदि नवम भाव का स्वामी नीच का हो या यह भाव छठे, आठवें या बारहवें (6, 8, 12) भाव में स्थित हो, तब भी पितृदोष का निर्माण होता है।
- पांचवें भाव में पापी ग्रह: यदि पांचवें भाव में शनि, राहु, केतु या मंगल जैसे क्रूर व पाप ग्रह विराजमान हों, तो व्यक्ति पितृदोष से पीड़ित होता है।
पितृदोष के बुरे प्रभावों से मुक्ति के अचूक उपाय
यदि आप भी इस दोष से परेशान हैं, तो ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार नीचे दिए गए उपायों को करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और कष्ट दूर होते हैं:
- पीपल वृक्ष की पूजा: पीपल के वृक्ष में देवताओं और पितरों का वास माना जाता है। नियमित रूप से पीपल को जल चढ़ाने और उसके पास घी या सरसों के तेल का दीपक जलाने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है।
- मंत्र जाप: पितरों की विशेष कृपा पाने के लिए नियमित रूप से ‘ॐ श्री सर्व पितृ देवताभ्यो नमो नमः’ मंत्र का जाप करें।
- तर्पण और दान: हर साल आने वाले ‘पितृपक्ष’ और प्रत्येक महीने की ‘अमावस्या’ के दिन पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य अवश्य करना चाहिए।
- जीव-जंतुओं की सेवा: रोज सुबह या शाम को कौए को रोटी खिलाएं, चींटियों को आटा/शक्कर डालें और गौमाता की सेवा करें। ऐसा करने से पितर अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
- गया जी में पूजन: यदि पितृदोष बहुत अधिक गंभीर हो, तो बिहार के गया तीर्थ स्थल पर जाकर पितरों के निमित्त विधि-विधान से श्राद्ध और तर्पण पूजन कराना सबसे उत्तम माना जाता है।
- विष्णु-महादेव की शरण: भगवान विष्णु और देवाधिदेव महादेव की नियमित पूजा-अर्चना करने से भी इस दोष के नकारात्मक प्रभाव समाप्त हो जाते हैं।
- बुजुर्गों का सम्मान: सबसे सरल और प्रभावी उपाय यह है कि आप अपने घर के बड़े-बुजुर्गों और माता-पिता का आदर करें, उनकी सेवा करें। जिस घर में बुजुर्ग खुश रहते हैं, वहाँ पितृदोष का बुरा असर कभी नहीं होता।








