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रेलवे की नई उड़ान: ट्रैक से टिकट तक सुरक्षा- स्टैंड‑अलोन CCTV कैमरों से यात्रियों को मिलेगा चौबीसों घंटे भरोसा Katni Satna Rail Line

SwaRail बनाम IRCTC Rail Connect

रेलवे की नई उड़ान: ट्रैक से टिकट तक सुरक्षा- स्टैंड‑अलोन CCTV कैमरों से यात्रियों को मिलेगा चौबीसों घंटे भरोसा Katni Satna Rail Line । कटनी-सतना रेलमार्ग (Katni Satna Rail Line) और उस पर दौड़ रही ट्रेनों पर अब तीसरी नजर रहेगी। इस रेलखंड पर ट्रेनों में पथराव की घटनाएं हो चुकी हैं। यात्रियों के सामान चोरी के मामले भी सामने आते रहे हैं। इस पर अंकुश लगाने के लिए अब आधुनिक निगरानी तंत्र विकसित किया गया है। सतना से कटनी आउटर तक स्टैंड अलोन सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए हैं।

रेलवे की नई उड़ान: ट्रैक से टिकट तक सुरक्षा- स्टैंड‑अलोन CCTV कैमरों से यात्रियों को मिलेगा चौबीसों घंटे भरोसा Katni Satna Rail Line

निरंतर घटनाओं से जबलपुर रेल मंडल के अंतर्गत आने वाला कटनी-सतना रेलखंड संवेदनशील बन गया है। इसे देखते हुए पश्चिम मध्य रेल ने रेलमार्ग पर सीसीटीवी कैमरे से निगरानी का निर्णय किया है।

  • इससे ट्रैक के आसपास असामान्य गतिविधि एवं ट्रेन के आसपास असामाजिक तत्वों की गतिविधि की जानकारी तुरंत मिल जाएगी। पथराव और यात्रियों के सामान चोरी होने के मामलों में आरोपितों की पहचान में सहायता मिलेगी।
  • प्रभावी कार्रवाई से रेलमार्ग और ट्रेन की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी। नई व्यवस्था का विस्तार अन्य रेलखंडों पर भी होगा।

अलोन सीसीटीवी कैमरों की खूबियां

रेलखंड में स्थापित किए गए सीसीटीवी कैमरे सौर ऊर्जा से संचालित होंगे। यह सीसीटीवी कैमरे चौबीस घंटे काम करेंगे। जीवंत दृश्य के साथ ही श्रव्य भी रिकार्ड करेंगे। इन सीसीटीवी कैमरों को पश्चिम मध्य रेल मुख्यालय के नियंत्रण कक्ष से जोड़ा गया है। संबंधित क्षेत्र के रेल सुरक्षा बल पोस्ट तक भी इन सीसीटीवी कैमरों की लाइव रिकॉर्डिंग पहुंचेगी। पश्चिम मध्य रेल की इस पहल ने संवेदनशील खंड में निवारक निगरानी और खुफिया-आधारित पुलिसिंग को काफी मजबूत किया है।

दोनों स्टेशन के यार्ड भी नजर… बच नहीं पाएंगे अपराधी

रेलवे के सीसीटीवी कैमरों की नजर में दोनों स्टेशन के यार्ड भी रहेंगे। स्टेशन में जगह नहीं होने पर कई ट्रेनें यार्ड में रुकती हैं। ट्रेन में चोरी, छीनाझपटी जैसी वारदात कर कई आरोपित ट्रेन के यार्ड में रुकने एवं धीरे होने पर उतरकर भाग जाते हैं। कई मामलों में आरोपी की पहचान तक नहीं हो पाती है।

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