Pahalgam Attack Chargesheet: पहलगाम आतंकी हमले पर NIA का बड़ा खुलासा- दो टूरिस्ट गाइड की गद्दारी से बहे थे 26 बेकसूरों के खून; ऐसे बेनकाब हुआ पाकिस्तान। कश्मीर के चर्चित पहलगाम आतंकी हमले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की चार्जशीट से कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। एनआईए सूत्रों के मुताबिक, यदि स्थानीय टूरिस्ट गाइड परवेज और बशीर अहमद ने वक्त रहते अपने लालच को छोड़कर पुलिस या सुरक्षा बलों को खबर दी होती, तो बैसरन घाटी में 26 बेकसूर लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
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चार्जशीट के मुताबिक, इन दोनों स्थानीय गाइडों ने चंद पैसों के लिए न सिर्फ पाकिस्तानी आतंकियों को पनाह दी, बल्कि उन्हें खाना खिलाकर अमरनाथ यात्रा और सुरक्षा बलों के कैंपों की खुफिया जानकारी भी साझा की।
ढोंक (झोपड़ी) में आतंकियों ने खाई रोटी, बशीर-परवेज को मिले ₹3000
एनआईए के सूत्रों के अनुसार, 22 अप्रैल को बैसरन घाटी में कहर बरपाने से ठीक एक दिन पहले लश्कर-ए-तैयबा के तीन खूंखार आतंकी— फैजल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी, टूरिस्ट गाइड बशीर अहमद के संपर्क में आए थे।
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पहचान छिपाई और पनाह दी: बशीर इन तीनों को सुरक्षित स्थान देने के बहाने अपने साथी परवेज की ‘ढोंक’ (पहाड़ी झोपड़ी) पर ले गया। हथियारों से लैस इन आतंकियों का पंजाबी लहजा सुनकर बशीर समझ गया था कि ये पाकिस्तानी ‘मुजाहिद’ हैं, फिर भी उसने पुलिस को सूचना नहीं दी।
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5 घंटे तक की मेहमाननवाज़ी: आतंकी करीब 5 घंटे तक परवेज की झोपड़ी में रुके। वहां उन्होंने अल्लाह के नाम पर मदद मांगी, चाय पी और खाना खाया।
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सामान और पैसा: रात 10 बजे जाते समय आतंकियों ने खाना पैक करवाया और परवेज-बशीर को 3,000 रुपये दिए। जाते-जाते आतंकी झोपड़ी से सब्जी, हल्दी, नमक समेत पतीला और करछी भी अपने साथ ले गए।
हमले से कुछ घंटे पहले भी पार्क के बाहर बैठे दिखे थे आतंकी
जांच में यह भी सामने आया है कि 22 अप्रैल को हमले वाले दिन परवेज और बशीर दो पर्यटकों (टूरिस्ट्स) को लेकर बैसरन पार्क गए थे। वहां उन्होंने उन्हीं तीनों आतंकियों को पार्क के बाहर फेंस (बाड़) पर बैठे देखा था। दोनों गाइड पर्यटकों को लेकर जैसे ही नीचे पहलगाम पहुंचे, ऊपर आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी कर धर्म पूछकर 26 लोगों का खून बहा दिया। इसके बाद दोनों गाइड चुपचाप अंडरग्राउंड हो गए।
अमरनाथ यात्रा की मांगी थी जानकारी: दोनों गाइडों ने एनआईए के सामने कबूल किया है कि आतंकियों ने उनसे कश्मीर में सुरक्षा बलों की मूवमेंट, उनके कैंपों के लोकेशन और आगामी अमरनाथ यात्रा के रूट और सुरक्षा को लेकर लंबी पूछताछ की थी।
‘False Flag’ नैरेटिव की पाकिस्तानी साजिश फेल
पहलगाम हमले के बाद आतंकी संगठन TRF (द रेजिस्टेंस फ्रंट) ने पहले तो सोशल मीडिया पर हमले की जिम्मेदारी ली। लेकिन जब यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) ने इस नरसंहार की वैश्विक स्तर पर कड़ी निंदा की, तो पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ‘आईएसआई’ और लश्कर घबरा गए।
भारतीय एजेंसियों को भटकाने के लिए TRF ने नया पैंतरा बदला और दावा किया कि उनका टेलीग्राम चैनल हैक हो गया था और इस हमले में उनका हाथ नहीं है। हालांकि, जब एनआईए ने ‘TheResistanceFront_OfFcial’ टेलीग्राम चैनल की गहन फॉरेंसिक जांच की, तो पता चला कि यह चैनल पाकिस्तान के रावलपिंडी से ही ऑपरेट किया जा रहा था। पाकिस्तान का यह ‘फॉल्स फ्लैग’ नैरेटिव पूरी तरह फ्लॉप साबित हुआ।
लाहौर और कराची से ऑनलाइन खरीदे गए थे आतंकियों के मोबाइल
ऑपरेशन महादेव के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा ढेर किए गए इन तीनों आतंकियों के पास से दो मोबाइल फोन बरामद हुए थे। एनआईए ने जब इन फोनों के IMEI नंबरों को ट्रैक किया, तो सीधे पाकिस्तान के दो बड़े शहरों के पते सामने आए:
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पहला मोबाइल (लाहौर): यह फोन पाकिस्तान के लाहौर स्थित कोट लखपत इलाके के कायद-ए-आजम इंडस्ट्रियल एस्टेट (पता: 109-M, C-10) से ऑनलाइन खरीदा गया था।
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दूसरा मोबाइल (कराची): इस फोन की खरीद पाकिस्तान के कराची स्थित ‘Faysal House Main Branch, Shahrah’ के पते पर ऑनलाइन की गई थी।
इन पुख्ता डिजिटल और वैज्ञानिक सबूतों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान के उस झूठ को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है, जिसमें वह कश्मीर में होने वाले हमलों में अपना हाथ होने से इनकार करता रहा है।

