PACS Savings Bank: एमपी की सहकारी समितियों में अब खुलेंगे बचत खाते; अपेक्स बैंक ने ग्वालियर-रीवा सहित 16 बैंकों को दी चेतावनी
PACS Savings Bank: एमपी की सहकारी समितियों में अब खुलेंगे बचत खाते; अपेक्स बैंक ने ग्वालियर-रीवा सहित 16 बैंकों को दी चेतावनी। मध्य प्रदेश में सहकारी ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश की प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) को अब केवल कर्ज बांटने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें बचत बैंक के रूप में विकसित किया जाएगा। अपेक्स बैंक ने स्पष्ट किया है कि जब किसानों का पैसा समितियों में जमा होगा, तभी ये संस्थाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगी।
PACS Savings Bank: एमपी की सहकारी समितियों में अब खुलेंगे बचत खाते; अपेक्स बैंक ने ग्वालियर-रीवा सहित 16 बैंकों को दी चेतावनी
साढ़े चार हजार में से केवल 3 हजार समितियों में खाते
वर्तमान आंकड़े सहकारी ढांचे की कमजोरी उजागर करते हैं। प्रदेश में कुल साढ़े चार हजार समितियां हैं, लेकिन इनमें से केवल तीन हजार में ही बचत खाते संचालित हो रहे हैं। बाकी 1500 समितियों में बैंकिंग सुविधाएं न होने के कारण किसानों को अन्य बैंकों का रुख करना पड़ता है।
ग्वालियर और रीवा सहित 16 जिले ‘कमजोर’ श्रेणी में
अपेक्स बैंक प्रशासन ने समीक्षा के बाद 16 जिला सहकारी बैंकों को कमजोर श्रेणी में रखा है। इनमें विशेष रूप से ग्वालियर और रीवा संभाग के जिले शामिल हैं। मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEOs) को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि:
- सभी समितियों में अनिवार्य रूप से बचत खाते खोले जाएं।
- किसानों को समितियों में पैसा जमा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
- आर्थिक रूप से पिछड़ी समितियों के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाए।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
अपेक्स बैंक के अनुसार, अगर समितियों के पास अपना फंड (बचत जमा) होगा, तो वे संकट के समय किसानों की बेहतर मदद कर सकेंगी और उन्हें बार-बार सरकारी मदद या बाहरी कर्ज पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। PACS Savings Bank: एमपी की सहकारी समितियों में अब खुलेंगे बचत खाते; अपेक्स बैंक ने ग्वालियर-रीवा सहित 16 बैंकों को दी चेतावनी

