मुंबई/नई दिल्ली: ग्लोबल मार्केट में जारी उथल-पुथल और विदेशी निवेशकों (FIIs/FPIs) की ताबड़तोड़ बिकवाली के कारण भारतीय शेयर बाजार ने हाल के वर्षों की सबसे खराब तिमाहियों में से एक का सामना किया है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) द्वारा जारी ताजा ‘मार्केट प्लस रिपोर्ट’ के अनुसार, मार्च तिमाही के दौरान देश के निवेशकों की इक्विटी वेल्थ (संपत्ति) में करीब ₹12.6 लाख करोड़ की भारी कमी दर्ज की गई है।
चौथी तिमाही (Q4) में उतार-चढ़ाव इस कदर हावी रहा कि भारतीय बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स Nifty 50 में 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखी गई।
आखिर क्यों ताश के पत्तों की तरह टूटा शेयर बाजार?
बाजार विश्लेषकों और एनएसई की रिपोर्ट के अनुसार, इस महागिरावट के पीछे 4 सबसे बड़े वैश्विक कारण रहे:
- भू-राजनीतिक तनाव और ईरान संघर्ष: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान संकट ने ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता बढ़ा दी।
- महंगा होता कच्चा तेल: कच्चे तेल (Crude Oil) की आसमान छूती कीमतों ने भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव डाला।
- पैसा ताइवान और साऊथ कोरिया शिफ्ट होना: वैश्विक निवेशकों का रुझान इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर सेक्टर्स की तरफ ज्यादा है। इसलिए विदेशी फंड्स भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे टेक-डोमिनेटेड देशों में लगा रहे हैं।
FPI हिस्सेदारी 17 साल के निचले स्तर पर, ₹76.5 लाख करोड़ पर आई घरेलू इक्विटी
- विदेशी निवेशकों की भारी निकासी: वित्तीय वर्ष 2026 के दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय बाजार से 19.6 अरब डॉलर (करीब ₹1.63 लाख करोड़) निकाल लिए। इस भारी बिकवाली के चलते NSE लिस्टेड कंपनियों में FPI की हिस्सेदारी घटकर 17 साल के निचले स्तर 15.8% पर आ गई है।
- घरेलू निवेशकों का कुल नेटवर्थ: मार्च 2026 तक एनएसई में लिस्टेड कंपनियों में घरेलू निवेशकों की कुल हिस्सेदारी (डायरेक्ट शेयर + म्यूचुअल फंड) घटकर ₹76.5 लाख करोड़ रह गई, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 13% कम है। NSE Market Report: मार्च तिमाही में भारतीय निवेशकों के डूबे ₹12.6 लाख करोड़; FPI हिस्सेदारी 17 साल के निचले स्तर पर, पर SIP ने रचा इतिहास
डायरेक्ट स्टॉक के बजाय म्यूचुअल फंड और SIP पर बढ़ा भरोसा
रिपोर्ट से भारतीय रिटेल निवेशकों के व्यवहार को लेकर एक बेहद दिलचस्प और मैच्योर ट्रेंड भी सामने आया है:
- म्यूचुअल फंड की रिकॉर्ड हिस्सेदारी: बाजार में इतनी बड़ी गिरावट के बावजूद आम लोगों ने म्यूचुअल फंड में पैसा लगाना बंद नहीं किया। SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के दम पर कंपनियों में म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी बढ़कर रिकॉर्ड 11.4% पर पहुंच गई है। यह लगातार 11वीं तिमाही है जब म्यूचुअल फंड का दबदबा बढ़ा है।
- डायरेक्ट ट्रेडिंग से दूरी: खुद से सीधे शेयर (Direct Stocks) खरीदने वाले व्यक्तिगत निवेशकों की हिस्सेदारी लगातार दूसरी तिमाही में घटकर 5 साल के निचले स्तर (9.1%) पर आ गई है।
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एक्सपर्ट्स का क्या है कहना? विशेषज्ञों के मुताबिक, डायरेक्ट इक्विटी में हिस्सेदारी घटने का मतलब यह कतई नहीं है कि छोटे निवेशक बाजार छोड़ रहे हैं। बल्कि, इसका मतलब यह है कि भारतीय निवेशक अब अधिक समझदार हो रहे हैं। वे बाजार के सीधे जोखिम से बचने के लिए म्यूचुअल फंड और SIP के जरिए लंबी अवधि और व्यवस्थित निवेश (Systematic Investment) को प्राथमिकता दे रहे हैं।

