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लखीमपुर खीरी केस में नया मोड़: पूर्व केंद्रीय मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा को यूपी पुलिस से क्लीन चिट, अगले महीने होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

लखीमपुर खीरी केस में नया मोड़: पूर्व केंद्रीय मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा को यूपी पुलिस से क्लीन चिट, अगले महीने होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

लखीमपुर खीरी केस में नया मोड़: पूर्व केंद्रीय मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा को यूपी पुलिस से क्लीन चिट, अगले महीने होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

नई दिल्ली/लखीमपुर: चर्चित लखीमपुर खीरी हिंसा मामले से जुड़ी एक बड़ी और महत्वपूर्ण कानूनी खबर सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे और मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को गवाहों को डराने-धमकाने के मामले में क्लीन चिट दे दी है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान यूपी पुलिस ने स्पष्ट किया कि जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जो इस कृत्य में आशीष मिश्रा या उनके पिता की संलिप्तता को साबित करता हो।

यह सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष बेंच के समक्ष हो रही थी।

 जांच पूरी, आशीष और अजय मिश्रा के खिलाफ कोई सबूत नहीं: पुलिस

आशीष मिश्रा फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत पर जेल से बाहर हैं और शीर्ष अदालत इस पूरे मामले के ट्रायल की प्रगति पर लगातार नजर रख रही है। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट (Status Report) दाखिल की गई:

  • चार्जशीट दाखिल: पुलिस ने कोर्ट को बताया कि गवाहों को धमकाने के आरोप में दर्ज की गई एफआईआर (FIR) की जांच अब पूरी हो चुकी है। इस मामले में अमनदीप सिंह नाम के एक व्यक्ति के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई है, जिस पर सक्षम अदालत ने संज्ञान भी ले लिया है।

  • क्लीन चिट: स्टेटस रिपोर्ट में साफ किया गया कि पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा उर्फ टेनी, उनके बेटे आशीष मिश्रा और अन्य कथित लोगों की भूमिका की गहन जांच की गई, लेकिन उनके खिलाफ दोषी ठहराने लायक कोई सबूत नहीं मिला। जांच का निष्कर्ष है कि वे इस धमकी कांड में शामिल नहीं थे।

  • 64 गवाहों के बयान बाकी: पुलिस ने कोर्ट को यह भी अवगत कराया कि लखीमपुर खीरी मुख्य मामले में अभी 64 गवाहों से पूछताछ होना बाकी है।

अतिरिक्त हलफनामे के लिए शिकायतकर्ता को 2 हफ्ते का समय

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने यूपी पुलिस की इस स्टेटस रिपोर्ट को अपने रिकॉर्ड में ले लिया है। इसके साथ ही, कोर्ट ने मामले के मूल शिकायतकर्ता को इस स्टेटस रिपोर्ट पर अपना जवाब (अतिरिक्त हलफनामा) दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। इस संवेदनशील मामले पर अब अगले महीने अगली सुनवाई मुकर्रर की गई है।

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 सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद दर्ज हुई थी FIR

गौरतलब है कि गवाहों को डराने-धमकाने के इस मामले में यूपी पुलिस ने पिछले साल अक्टूबर में एफआईआर दर्ज की थी।

  • पुलिस की लापरवाही पर लगी थी फटकार: शुरुआत में बलजिंदर सिंह नामक गवाह ने शिकायत की थी कि उन्हें अपना बयान वापस लेने के लिए धमकियां मिल रही हैं, लेकिन स्थानीय पुलिस ने इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए पुलिस की कड़ी आलोचना की थी।

  • पंजाब जाकर दर्ज किया था बयान: पुलिस ने पहले दलील दी थी कि गवाह बयान दर्ज कराने सामने नहीं आ रहा है, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद कोर्ट के कड़े निर्देश पर लखीमपुर के असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) ने पंजाब के मुक्तसर में जाकर शिकायतकर्ता का पता लगाया और उनका बयान दर्ज किया। इसके बाद आईपीसी (IPC) की धारा 195-A, 506 और 120-B के तहत मामला दर्ज हुआ था। लखीमपुर खीरी केस में नया मोड़: पूर्व केंद्रीय मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा को यूपी पुलिस से क्लीन चिट, अगले महीने होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

 क्या है पूरा लखीमपुर खीरी मामला?

यह पूरा विवाद 3 अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई हिंसक घटना से जुड़ा है। केंद्र सरकार के तत्कालीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के एक समूह को आशीष मिश्रा से कथित तौर पर जुड़े एक काफिले की गाड़ियों ने कुचल दिया था। इस घटना और उसके बाद भड़की हिंसा में 4 किसानों सहित कुल 8 लोगों की मौत हो गई थी। मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा इस समय मुख्य मुकदमे का सामना कर रहे हैं और वर्तमान में कोर्ट की कड़ी शर्तों के साथ जमानत पर बाहर हैं।

– यशभारत डॉट कॉम

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