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सिर्फ एक बूंद खून से खुलेगा कैंसर और डायबिटीज का राज- जानें क्या है ‘GKI TEST’ और यह कैसे करेगा बीमारियों की छुट्टी

सिर्फ एक बूंद खून से खुलेगा कैंसर और डायबिटीज का राज- जानें क्या है 'GKI TEST' और यह कैसे करेगा बीमारियों की छुट्टी

सिर्फ एक बूंद खून से खुलेगा कैंसर और डायबिटीज का राज- जानें क्या है ‘GKI TEST’ और यह कैसे करेगा बीमारियों की छुट्टी

नई दिल्ली/हेल्थ डेस्क: क्या आप सोच सकते हैं कि अस्पताल के चक्कर काटे बिना, महंगे स्कैन और दर्जनों ब्लड टेस्ट कराए बिना, सिर्फ एक छोटी सी सुई चुभाकर खून की एक बूंद से यह पता चल जाए कि आपको आने वाले सालों में कैंसर, हार्ट डिजीज या अल्जाइमर जैसी जानलेवा बीमारी हो सकती है या नहीं?

सुनने में यह भले ही किसी जादू जैसा लगे, लेकिन चिकित्सा विज्ञान की दुनिया में वैज्ञानिकों ने एक क्रांतिकारी खोज कर ली है। विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य की हेल्थ स्क्रीनिंग अब ग्लूकोज कीटोन इंडेक्स (GKI) टेस्ट के जरिए बेहद आसान और सटीक होने जा रही है। यह टेस्ट मिनटों में शरीर के मेटाबॉलिज्म का हाल बताकर गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत दे सकता है।

 क्या है ग्लूकोज कीटोन इंडेक्स (GKI) टेस्ट?

जीकेआई (GKI) टेस्ट मुख्य रूप से शरीर में मौजूद ब्लड शुगर (ग्लूकोज) और कीटोन के स्तर के अनुपात (Ratio) की जांच करता है।

  • यह टेस्ट यह समझने में मदद करता है कि आपका मेटाबॉलिज्म (Metabolism) कितना स्वस्थ है, यानी आपका शरीर ऊर्जा बनाने के लिए भोजन का इस्तेमाल सही तरीके से कर रहा है या नहीं।

  • क्या होते हैं कीटोन? जब शरीर को ऊर्जा (Energy) बनाने के लिए पर्याप्त कार्बोहाइड्रेट नहीं मिलते, तब हमारा शरीर जमा हुई चर्बी (Fat) को जलाना शुरू करता है। इस प्रक्रिया में लिवर कुछ विशेष रसायन बनाता है, जिन्हें ‘कीटोन’ कहा जाता है। कीटोन का बढ़ना इस बात का सबूत है कि शरीर ऊर्जा के लिए फैट का इस्तेमाल कर रहा है।

कैसे काम करती है यह जांच? (रिपोर्ट का गणित)

यह टेस्ट ग्लूकोज और कीटोन के अनुपात के आधार पर सेहत का गणित तय करता है:

GKI का स्तर सेहत पर असर संकेत
कम GKI (Low GKI) ब्लड शुगर कम और कीटोन ज्यादा 🟢 बेहतर मेटाबॉलिक हेल्थ और बीमारियों का कम जोखिम
अधिक GKI (High GKI) ब्लड शुगर ज्यादा और कीटोन कम 🔴 खराब मेटाबॉलिज्म और भविष्य में गंभीर बीमारियों का खतरा

वैज्ञानिकों का दावा: पूर्व में हुए कई शोधों से यह साबित हो चुका है कि लो ब्लड शुगर और हाई कीटोन का कॉम्बिनेशन कई गंभीर और क्रॉनिक बीमारियों (विशेषकर मोटापे से जुड़ी बीमारियों) के खतरे को काफी हद तक कम कर देता है।

इन 8 गंभीर व जानलेवा बीमारियों का पहले ही चल जाएगा पता

मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, यह साधारण सा दिखने वाला टेस्ट भविष्य में होने वाली कई खतरनाक नॉन-कम्युनिकेबल (गैर-संक्रामक) बीमारियों का सटिक पूर्वानुमान लगा सकता है: सिर्फ एक बूंद खून से खुलेगा कैंसर और डायबिटीज का राज- जानें क्या है ‘GKI TEST’ और यह कैसे करेगा बीमारियों की छुट्टी

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  • कैंसर (Cancer)
  • हार्ट डिजीज (हृदय रोग)
  • टाइप-2 डायबिटीज (Diabetes)
  • मोटापा (Obesity)
  • अल्जाइमर (Alzheimer’s) – भूलने की बीमारी
  • पार्किंसंस (Parkinson’s) – नसों और हाथ-कांपने की बीमारी
  • हंटिंगटन डिजीज (Huntington’s)
  • मल्टीपल स्क्लेरोसिस (Multiple Sclerosis) – दिमाग और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बीमारी

 2050 का सबसे बड़ा संकट: नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज

दुनियाभर में होने वाली हर 10 में से लगभग 7 से 8 मौतें (करीब 75% मौतें) नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज के कारण होती हैं। ये बीमारियां छुआछूत से नहीं फैलतीं, बल्कि खराब लाइफस्टाइल के कारण शरीर को अंदर ही अंदर खोखला करती हैं। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इनका पता तब चलता है जब पानी सिर से ऊपर जा चुका होता है।

अनुमान है कि साल 2050 तक ये बीमारियां दुनिया पर सबसे बड़ा स्वास्थ्य बोझ बन जाएंगी। ऐसे में जीकेआई जैसा सस्ता और तुरंत परिणाम देने वाला टेस्ट समय रहते खानपान और लाइफस्टाइल बदलकर बीमारी को टालने का एक बेहतरीन मौका देगा।

 क्या कहते हैं दुनिया के बड़े वैज्ञानिक?

“इन गंभीर बीमारियों का कारण केवल हमारे जीन्स (Genes) नहीं होते, बल्कि हमारी जीवनशैली इन्हें तय करती है। जीकेआई टेस्ट भविष्य में कैंसर और अन्य क्रॉनिक बीमारियों की रोकथाम और उनके बेहतर मैनेजमेंट का एक बिल्कुल नया रास्ता खोलने जा रहा है।”

– प्रो. थॉमस सेफ्राइड (जेनेटिक्स के प्रोफेसर, बोस्टन कॉलेज और मुख्य लेखक)

“यह टेस्ट केवल वजन कम होने पर ध्यान देने के बजाय पूरे शरीर की अंदरूनी सेहत की वास्तविक तस्वीर सामने रखता है। इससे लोगों की जीवनशैली में आ रहे सुधारों को आसानी से ट्रैक किया जा सकता है।”

– डॉ. इसाबेला कूपर (बायोकेमिस्ट, यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टमिंस्टर और सह-लेखक)

– यशभारत डॉट कॉम

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