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बंगाल में नई पारी: शुभेंदु अधिकारी ने ली विधायक पद की शपथ; भवानीपुर सीट अपने पास रखी, नंदीग्राम छोड़ने का किया बड़ा फैसला

बंगाल में शुभेंदु राज: पहली कैबिनेट में ही ममता सरकार के फैसले पलटे; BSF को 45 दिन में मिलेगी जमीन, सरकारी नौकरियों में उम्र सीमा 5 साल बढ़ी

बंगाल में शुभेंदु राज: पहली कैबिनेट में ही ममता सरकार के फैसले पलटे; BSF को 45 दिन में मिलेगी जमीन, सरकारी नौकरियों में उम्र सीमा 5 साल बढ़ी

बंगाल में नई पारी: शुभेंदु अधिकारी ने ली विधायक पद की शपथ; भवानीपुर सीट अपने पास रखी, नंदीग्राम छोड़ने का किया बड़ा फैसला।  पश्चिम बंगाल विधानसभा बुधवार को एक ऐतिहासिक पल की गवाह बनी। विधानसभा परिसर में आयोजित भव्य समारोह में नवनिर्वाचित विधायकों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। इस समारोह के केंद्र में रहे भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी, जिन्होंने दो सीटों से जीत दर्ज करने के बाद आज अपनी भविष्य की रणनीति स्पष्ट कर दी।

संविधान निर्माता को नमन और गार्ड ऑफ ऑनर

शपथ ग्रहण से पहले विधानसभा परिसर में एक गरिमामय माहौल दिखाविधायकों ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया। नवनिर्वाचित विधायकों को औपचारिक रूप से गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। प्रोटेम स्पीकर तापस राय की मौजूदगी में शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी हुई।

शुभेंदु का ‘मास्टरस्ट्रोक’: भवानीपुर को चुना, नंदीग्राम छोड़ा

2026 के विधानसभा चुनावों में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर, दोनों ही हाई-प्रोफाइल सीटों से ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। शपथ लेने के बाद उन्होंने अपना निर्णय सार्वजनिक किया:शुभेंदु अब भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने अपनी पारंपरिक सीट नंदीग्राम को छोड़ने का फैसला किया है, जिससे अब वहां उपचुनाव की स्थिति बनेगी।

2021 से 2026: बदल गया सत्ता का केंद्र?

याद दिला दें कि 2021 के चुनावों में नंदीग्राम में शुभेंदु ने ममता बनर्जी को हराकर देश का ध्यान खींचा था। लेकिन 2026 के नतीजों ने शुभेंदु को बंगाल की राजनीति के सबसे ताकतवर ध्रुव के रूप में स्थापित कर दिया है। भवानीपुर (जो ममता बनर्जी का गढ़ माना जाता था) को चुनकर शुभेंदु ने एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है।

सियासी गलियारों में चर्चा

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शुभेंदु का भवानीपुर को चुनना सत्ता के सीधे मुकाबले का संकेत है। नंदीग्राम छोड़ने के फैसले के बाद राज्य की राजनीति में अब नए समीकरण बनने तय हैं, जिसका असर आने वाले स्थानीय और उपचुनावों पर साफ दिखेगा।

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