NEET-UG Massive Reforms: पेपर लीक और गड़बड़ी पर फुल स्टॉप; सरकारी केंद्रों पर परीक्षा, जैमर और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन समेत NTA ने किए 5 बड़े बदलाव
नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘NEET-UG’ को पूरी तरह सुरक्षित और लीक-प्रूफ बनाने के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने कमर कस ली है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व प्रमुख और एनटीए सुधार समिति के अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन ने सुप्रीम कोर्ट में एक विस्तृत हलफनामा दाखिल कर इन सुधारों की आधिकारिक जानकारी दी है।
हलफनामे के मुताबिक, साल 2024 में परीक्षा को लेकर उपजे विवादों के बाद शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति के 101 सुझावों को धरातल पर उतारने का काम तेजी से चल रहा है। इसके लिए एक ‘हाई पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी’ लगातार निगरानी कर रही है।
1. ‘डिजी-एग्जाम’ की ओर कदम: बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली
भविष्य में किसी भी छात्र की जगह कोई दूसरा ‘मुन्नाभाई’ (डमी कैंडिडेट) परीक्षा न दे सके, इसके लिए सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं:
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सख्त पहचान प्रक्रिया: उम्मीदवारों की अचूक पहचान सुनिश्चित करने के लिए परीक्षा केंद्रों पर डिजिटल बायोमेट्रिक सत्यापन (Biometric Verification) अनिवार्य कर दिया गया है। समिति ने इसे भारत की आगामी “डिजी-एग्जाम” (Digi-Exam) व्यवस्था की दिशा में पहला और सबसे मजबूत कदम बताया है।
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CCTV और जैमर का पहरा: परीक्षा केंद्रों पर लाइव सीसीटीवी कैमरों से सीधे केंद्रीय स्तर पर निगरानी रखी जा रही है। साथ ही, ब्लूटूथ या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए नकल रोकने के लिए हाई-फ्रीक्वेंसी मोबाइल सिग्नल जैमर लगाए गए हैं।
2. प्राइवेट सेंटर्स का खेल खत्म; 99.5% केंद्र सरकारी संस्थानों में
परीक्षा केंद्रों के चयन में होने वाले कथित झोल को खत्म करने के लिए एनटीए ने अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी है:
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सरकारी केंद्रों को प्राथमिकता: नीट-यूजी 2026 परीक्षा के $99.5\%$ से ज्यादा केंद्र केवल सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में ही बनाए गए हैं, जहां सुरक्षा और गोपनीयता का स्तर बेहद कड़ा होता है।
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होम डिस्ट्रिक्ट पॉलिसी: छात्रों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्थित प्रयास किया जा रहा है कि हर परीक्षार्थी को उसके अपने गृह जिले (Home District) में ही परीक्षा केंद्र आवंटित किया जाए।
3. डेटा एनालिटिक्स और AI से पकड़ी जाएगी संदिग्ध गतिविधि
तकनीक के इस दौर में अब एनटीए गड़बड़ी करने वालों को पकड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा ले रहा है:
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पैटर्न की पहचान: परीक्षा खत्म होने के बाद डेटा एनालिटिक्स सॉफ्टवेयर के जरिए देश भर के नतीजों और छात्र पैटर्न्स की जांच की जाती है। यदि किसी एक केंद्र या क्षेत्र में अचानक कोई असामान्य (Suspicious) पैटर्न या अंक दिखते हैं, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर देता है।
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AI शिकायत निवारण: छात्रों की समस्याओं और शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए हेल्पडेस्क और कॉल सेंटर सक्रिय हैं। आने वाले समय में शिकायत निवारण प्रणाली (Grievance Redressal System) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) तकनीकों को जोड़ा जा रहा है।
4. सुरक्षा के लिए नए पद; IIT और UGC के विशेषज्ञों की एंट्री
संस्थान को आंतरिक रूप से मजबूत और तकनीकी रूप से अपग्रेड करने के लिए कड़े प्रशासनिक फैसले लिए गए हैं:
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16 नए पद सृजित: एनटीए की कार्यप्रणाली को सुचारू और पारदर्शी बनाने के लिए विशेष तौर पर 16 नए प्रशासनिक व तकनीकी पद बनाए गए हैं।
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दिग्गज संस्थानों की मदद: प्रश्नपत्र तैयार करने, उसकी प्रिंटिंग, लॉजिस्टिक्स और कड़ी जांच व्यवस्था के लिए IIT, UGC और केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के शीर्ष विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। परीक्षा से जुड़े जमीनी कर्मियों को भी अब नियमित और विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
5. कंप्यूटर आधारित (CBT) परीक्षा और उम्र सीमा पर बड़ा फैसला जल्द
राधाकृष्णन समिति के कई सुझावों पर अमल करते हुए नीट-यूजी 2025 और 2026 की परीक्षाओं को सफलतापूर्वक आयोजित कराया जा चुका है, लेकिन कुछ दीर्घकालिक नीतिगत बदलाव अभी प्रक्रिया में हैं:
आगामी बड़े बदलाव: नीट-यूजी को पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित परीक्षा (Computer Based Test – CBT) बनाने, परीक्षा को साल में एक से अधिक चरणों (Multiple Phases) में आयोजित करने और उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम/अधिकतम उम्र सीमा तय करने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अभी अंतिम मुहर लगना बाकी है। हलफनामे के अनुसार, इन विषयों पर स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ उच्च स्तरीय चर्चा चल रही है, जिसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।








