NCERT का बड़ा खुलासा: सोशल मीडिया पर वायरल ‘आपातकाल अध्याय’ वाली कक्षा 9 की किताब नकली; कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9वीं की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में ‘आपातकाल (Emergency)’ अध्याय को लेकर चल रहे विवाद पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। एनसीईआरटी ने साफ किया है कि सोशल मीडिया और विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कक्षा 9वीं की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक का एक नकली और पायरेटेड संस्करण (Fake Version) प्रसारित किया जा रहा है।
NCERT ने एक्स (X) पर जारी किया बयान; कही ये बड़ी बातें
एनसीईआरटी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर बयान जारी कर छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को सचेत किया है: NCERT का बड़ा खुलासा: सोशल मीडिया पर वायरल ‘आपातकाल अध्याय’ वाली कक्षा 9 की किताब नकली; कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
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पायरेटेड प्रतियों पर ध्यान: एनसीईआरटी के मुताबिक, उनके संज्ञान में आया है कि कक्षा 9वीं की सामाजिक विज्ञान (भाग-1) की किताब, “समाज को समझना: भारत और उससे परे” का एक फर्जी मुद्रित (Printed) और डिजिटल संस्करण मैसेजिंग ग्रुप्स और वेबसाइटों पर साझा किया जा रहा है।
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कानूनी कार्रवाई की चेतावनी: परिषद ने चेतावनी दी है कि इस तरह का अनधिकृत प्रसार पूरी तरह से अवैध है। ऐसा करना कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के तहत एक दंडनीय अपराध है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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आधिकारिक स्रोतों का ही करें उपयोग: एनसीईआरटी ने सलाह दी है कि पुस्तकों को केवल आधिकारिक स्रोतों जैसे— एनसीईआरटी की मुख्य वेबसाइट (ncert.nic.in), ई-पाठशाला ऐप या अधिकृत विक्रेताओं के माध्यम से ही खरीदें। अनौपचारिक स्रोतों की सामग्री गलत, अधूरी या मनगढ़ंत हो सकती है।
क्या है ‘आपातकाल अध्याय’ का पूरा विवाद?
इंटरनेट पर प्रसारित हो रही इस कथित किताब के “Emergency Chapter” को लेकर राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में बहस छिड़ी हुई है। वायरल सामग्री के अनुसार, इस अध्याय में लिखा गया है:
“भारत में लोकतंत्र के सामने आई प्रमुख चुनौतियों में से एक 1975-77 में आपातकाल लागू होने के दौरान दर्ज की गई थी। 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार के प्रति जनता का असंतोष बढ़ रहा था। जून 1975 में सरकार ने आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल लागू किया, जिसके दौरान मौलिक अधिकार निलंबित किए गए और प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई।”
अब एनसीईआरटी के स्पष्टीकरण के बाद यह साफ हो गया है कि ऑनलाइन घूम रहा यह संस्करण अनधिकृत है।
दूसरी ओर, कर्नाटक के शिक्षा समूह ने लगाया ‘भगवाकरण’ का आरोप
इसी बीच, एनसीईआरटी एक अन्य मोर्चे पर भी विवादों में घिर गई है। कर्नाटक के एक शिक्षा अधिकार संगठन ‘पीएएफआरई’ (PAFRE – पीपल्स एलायंस फॉर राइट टू एजुकेशन) ने एनसीईआरटी पर पाठ्यक्रम का ‘भगवाकरण’ करने का गंभीर आरोप लगाया है।
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कक्षा 6 की कन्नड़ पाठ्यपुस्तक पर सवाल: संगठन ने कक्षा 6 की कन्नड़ पाठ्यपुस्तक का नाम ‘कृष्ण’ रखे जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है।
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सांस्कृतिक अनदेखी का आरोप: पीएएफआरई के प्रधान संयोजक निरंजनारध्या वीपी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत स्कूली शिक्षा में पौराणिक कथाओं और धार्मिक विषयों को जानबूझकर थोपा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पाठ्यपुस्तक में कर्नाटक के मूल समाज सुधारकों और महान कवियों जैसे— आदिकवि पम्पा, कुवेम्पु, कोटा शिवराम कारंथ और बसवन्ना के विचारों व राज्य की विविध खान-पान संस्कृति को नजरअंदाज किया गया है।
एनसीईआरटी की किताबों को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में उपजे इन दोनों विवादों ने इस वक्त शैक्षणिक और राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है।








