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मेरे बॉस का दिमाग प्रेशर लेने के लिए नहीं बना’–भारत ने यूएस‑NATO को दिया जवाब, तेल की खरीद में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि

मेरे बॉस का दिमाग प्रेशर लेने के लिए नहीं बना’–भारत ने यूएस‑NATO को दिया जवाब, तेल की खरीद में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि।रूस से क्रूड ऑयल और गैस खरीदने पर नाटो चीफ मार्क रूट (NATO chief Mark Rutte) की धमकियों पर भारत ने मुंहतोड़ जवाब दिया है।

मेरे बॉस का दिमाग प्रेशर लेने के लिए नहीं बना’–भारत ने यूएस‑NATO को दिया जवाब, तेल की खरीद में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि

मेरे बॉस का दिमाग प्रेशर लेने के लिए नहीं बना’–भारत ने यूएस‑NATO को दिया जवाब, तेल की खरीद में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि

भारत ने ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर पश्चिमी देशों पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि हमें मत सिखाए ऑयल और गैस किससे खरीदना है। भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने नाटो चीफ मार्क रूट की धमकियों की धज्जियां उड़ाते हुए कहा कि उनके बॉस का दिमाग किसी भी प्रेशर को महसूस करने के लिए नहीं बना है और उन्हें ताकत यहीं से मिलती है।

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस मामले में नाटो चीफ की धमकियों के एक-एक धागे खोल दिए। केंद्रीय मंत्री पुरी वेबसाइट फर्स्ट पोस्ट के साथ बात कर रहे थे। इस दौरान जब उनसे पूछा गया कि अमेरिका ने भारत पर सेकेंडरी सैंक्शन लगाने की धमकी दी है। इसका भारत को होने वाले तेल सप्लाई पर क्या असर देखते हैं और हमारे देश का बैकअप प्लान क्या है?

अमेरिका और नाटो की टैरिफ धमकियों का केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने खरा-खरा जवाब दिया। केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि हम बहुत शुरुआत से ही इस बात को लेकर स्पष्ट थे कि हमें जहां से भी तेल खरीदना होगा हम खरीदेंगे क्योंकि प्रधानमंत्री का आखिरी कमिटमेंट उनके उपभोक्ताओं के साथ है। हम इस नीति पर कायम रहे हैं।

इस सवाल के जवाब में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि वे अपने दिमाग में किसी तरह का प्रेशर महसूस नहीं करते हैं। उन्होंने कहा, “सबसे पहले तो मैं ये बता दूं कि मैं अपने माइंड पर किसी तरह का प्रेशर नहीं लेता हूं. और मैं नहीं समझता हूं कि मेरे बॉस का दिमाग किसी प्रेशर को लेने के लिए बना हुआ है. और मैं अपनी ताकत यहीं से लेता हूं।

पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि फरवरी 2022 में जब रूस और यूक्रेन के बीच सैन्य टकराव हुआ तो जहां तक मुझे याद है हम अपनी कुल जरूरतों का दशमलव 2 प्रतिशत क्रूड ऑयल रूसी फेडरेशन से खरीद रहे थे। आज ये निश्चित रूप से बहुत बढ़ गया है। भारत अपने तेल सप्लाई में विविधता लाया है. पहले हम 27 देशों से तेल खरीदते थे अब ये संख्या बढ़कर 40 हो गई है।

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