खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):
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3 साल की डेडलाइन: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, जिन शिक्षकों ने पात्रता परीक्षा पास नहीं की है, उन्हें 3 साल के भीतर पात्रता सिद्ध करनी होगी।
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साल में दो बार परीक्षा: शिक्षकों पर मंडरा रहे संकट को जल्द दूर करने के लिए साल में दो बार परीक्षा आयोजित करने पर विचार चल रहा है।
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मिलेंगे केवल 2 मौके: शिक्षकों को अपनी योग्यता साबित करने के लिए परीक्षा में बैठने के अधिकतम दो अवसर दिए जा सकते हैं।
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कैबिनेट लेगी अंतिम फैसला: शिक्षक संगठनों से चर्चा के बाद लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) इसका अंतिम प्रस्ताव कैबिनेट की बैठक में मंजूरी के लिए भेजेगा।
कैबिनेट बैठक में मुहर के बाद लागू होगा नियम
स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस योजना को अंतिम रूप देने से पहले शिक्षक संगठनों के साथ बैठक कर सुझाव लिए जाएंगे। इसके बाद डीपीआई द्वारा तैयार प्रस्ताव को राज्य कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा, जहाँ इस पर अंतिम निर्णय होगा। विभाग ने इसके लिए 14 मई से ही जमीनी स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं।
विभाग करा रहा है ऑनलाइन तैयारी; मॉडल आंसर भी तैयार
शिक्षकों को परीक्षा में किसी प्रकार की कठिनाई न हो, इसके लिए लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) की असेसमेंट सेल ने अभी से कमर कस ली है:
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डिजिटल क्लासेस: शिक्षकों के लिए विषयवार ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कर दी गई हैं।
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यूट्यूब का सहारा: विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए शैक्षणिक वीडियो यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड किए गए हैं।
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पाठ्यक्रम और मॉडल आंसर: विभाग ने परीक्षा का पूरा सिलेबस तैयार कर लिया है। साथ ही मॉडल आंसर (Model Answers) भी तैयार कराए जा रहे हैं, ताकि शिक्षक परीक्षा के पैटर्न और प्रश्नों के स्तर को आसानी से समझ सकें।
अधिकारियों का कहना है: “सुप्रीम कोर्ट के निर्देश बेहद स्पष्ट हैं। हमारा प्रयास है कि परीक्षा का स्तर और अवसर इस तरह तय किए जाएं जिससे योग्य शिक्षकों को अपनी पात्रता सिद्ध करने का पूरा और निष्पक्ष मौका मिल सके।”
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