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MP Police Recruitment: सीएम मोहन यादव का बड़ा ऐलान-10 हजार पदों पर जल्द होगी पुलिस भर्ती; लेकिन ‘बोर्ड’ को लेकर उलझा पेंच, जानें पूरा मामला

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MP Police Recruitment: सीएम मोहन यादव का बड़ा ऐलान-10 हजार पदों पर जल्द होगी पुलिस भर्ती; लेकिन ‘बोर्ड’ को लेकर उलझा पेंच, जानें पूरा मामला।   मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के बेरोजगार युवाओं और पुलिस विभाग की तैयारियों में जुटे अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी राहत भरी घोषणा की है। भोपाल में आयोजित ‘केएफ रुस्तम जी सम्मान समारोह’ के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में पुलिस आरक्षकों (कांस्टेबल) सहित पुलिस विभाग में 10 हजार रिक्त पदों पर शीघ्र ही भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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MP Police Recruitment: सीएम मोहन यादव का बड़ा ऐलान-10 हजार पदों पर जल्द होगी पुलिस भर्ती; लेकिन ‘बोर्ड’ को लेकर उलझा पेंच, जानें पूरा मामला

इस बड़ी घोषणा के बाद जहां एक तरफ अभ्यर्थियों में उत्साह है, वहीं दूसरी तरफ भर्ती कराने वाली एजेंसी को लेकर प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा ‘पेंच’ फंस गया है।

PHQ ने भेजा प्रस्ताव: SI और सूबेदार के 1,041 पद भी शामिल

मुख्यमंत्री के एलान के तुरंत बाद पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने मुस्तैदी दिखाते हुए भर्ती का विस्तृत प्रस्ताव राज्य सरकार (शासन) को मंजूरी के लिए भेज दिया है। इस 10 हजार पदों के भर्ती प्रस्ताव की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

भर्ती कराने वाली एजेंसी पर संशय: ESB या पुलिस भर्ती बोर्ड?

घोषणा और प्रस्ताव के बावजूद पुलिस मुख्यालय और प्रशासनिक गलियारों में इस बात को लेकर अभी गहरा भ्रम (Confusion) बना हुआ है कि यह परीक्षा आखिर आयोजित कौन कराएगा?

  1. कर्मचारी चयन मंडल (ESB): अब तक राज्य में पुलिस आरक्षक और अन्य तकनीकी भर्तियां मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (पहले व्यापमं/PEB) द्वारा कराई जाती रही हैं।

  2. पुलिस भर्ती बोर्ड (Proposed Board): पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी चाहते हैं कि विभाग का अपना खुद का ‘स्वतंत्र भर्ती बोर्ड’ हो, ताकि अन्य राज्यों (जैसे यूपी, बिहार) की तर्ज पर पुलिस की भर्तियां बिना किसी देरी और बिना पेपर लीक के विवादों के तेज गति से पूरी की जा सकें।

ठंडे बस्ते में ‘भर्ती बोर्ड’ का प्रस्ताव; परीक्षण में बीते 13 महीने

दिलचस्प बात यह है कि पुलिस भर्ती बोर्ड के गठन का विचार नया नहीं है। मुख्यमंत्री ने पिछले वर्ष (अप्रैल 2025) पुलिस मुख्यालय में एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान खुद पुलिस भर्ती बोर्ड बनाने के निर्देश दिए थे ताकि भर्तियों में लेटलतीफी को खत्म किया जा सके।

कहां अटकी है फाइल? > मुख्यमंत्री की घोषणा के ठीक एक महीने बाद ही (मई 2025) पुलिस मुख्यालय ने शासन को भर्ती बोर्ड गठन का पूरा ड्राफ्ट भेज दिया था। लेकिन प्रशासनिक उदासीनता और फाइलों के चक्कर में पिछले 13 महीनों से यह प्रस्ताव केवल ‘परीक्षण’ के दौर से ही गुजर रहा है और अब तक इसे कैबिनेट या शासन से अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी है।

आगे क्या होगा?: पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री की इस ताजा घोषणा के बाद अब शासन स्तर पर लंबित पड़े ‘भर्ती बोर्ड’ के प्रस्ताव को कैबिनेट से जल्द मंजूरी मिल जाएगी, जिससे आगामी एक-दो महीनों के भीतर 10 हजार पदों का आधिकारिक विज्ञापन (Notification) जारी होने का रास्ता साफ हो सके।

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