MP Illegal Colonies News: मध्य प्रदेश में अवैध कॉलोनियों का ‘महा-बूम’- सरकारी रिकॉर्ड गायब, अब अवैध कॉलोनाइजरों की खैर नहीं; नए कानून में 10 साल की जेल और ₹1 करोड़ जुर्माने का ड्राफ्ट तैयार
MP Illegal Colonies News: मध्य प्रदेश में अवैध कॉलोनियों का 'महा-बूम'- सरकारी रिकॉर्ड गायब, अब अवैध कॉलोनाइजरों की खैर नहीं; नए कानून में 10 साल की जेल और ₹1 करोड़ जुर्माने का ड्राफ्ट तैयार

MP Illegal Colonies News: मध्य प्रदेश में अवैध कॉलोनियों का ‘महा-बूम’- सरकारी रिकॉर्ड गायब, अब अवैध कॉलोनाइजरों की खैर नहीं; नए कानून में 10 साल की जेल और ₹1 करोड़ जुर्माने का ड्राफ्ट तैयार
भोपाल: मध्य प्रदेश में भूमाफियाओं और अवैध कॉलोनाइजरों का जाल इस कदर फैल चुका है कि अब खुद सरकार के पास भी इसका कोई सटीक और अपडेटेड आंकड़ा मौजूद नहीं है। हाल ही में मुख्य सचिव अनुराग जैन द्वारा बुलाई गई एक हाई-प्रोफाइल समीक्षा बैठक में जब अवैध कॉलोनियों की संख्या को लेकर सवाल उठा, तो जिम्मेदार अधिकारी बगलें झांकने लगे।
हालांकि, इस बेलगाम होते जमीनी खेल को रोकने के लिए मोहन यादव सरकार अब तक का सबसे सख्त कानून लाने की तैयारी में है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने नए एक्ट का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, जिसके तहत अवैध कॉलोनी काटने वालों को सीधे सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
1. नए कानून का महा-प्रहार: 10 साल की जेल और ₹1 करोड़ का जुर्माना!
अवैध कॉलोनियों के जरिए आम जनता को ठगने और सरकारी राजस्व को चूना लगाने वाले कॉलोनाइजरों पर शिकंजा कसने के लिए नगरीय प्रशासन विभाग नया कानून ला रहा है। प्रस्तावित ड्राफ्ट में ये कड़े प्रावधान किए गए हैं:
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सजा और भारी जुर्माना: नए एक्ट के तहत अवैध कॉलोनी विकसित करने पर दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक का भारी-भरकम अर्थदंड (जुर्माना) लगाया जा सकता है। MP Illegal Colonies News: मध्य प्रदेश में अवैध कॉलोनियों का ‘महा-बूम’- सरकारी रिकॉर्ड गायब, अब अवैध कॉलोनाइजरों की खैर नहीं; नए कानून में 10 साल की जेल और ₹1 करोड़ जुर्माने का ड्राफ्ट तैयार
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लापरवाह अफसरों पर भी गिरेगी गाज: नए कानून में सिर्फ कॉलोनाइजर ही नहीं, बल्कि अपने क्षेत्रों में अवैध निर्माण को मूकदर्शक बनकर देखने वाले और मिलीभगत करने वाले नगरीय निकायों के अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ भी सख्त दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान शामिल किया गया है।
2. आंकड़ों की बाजीगरी: सरकारी अनुमान 2,500, असलियत 30 हजार के पार!
बैठक में अधिकारियों ने एक मोटा अनुमान लगाते हुए बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 2,500 से अधिक नई अवैध कॉलोनियां हैं, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा भयावह है:
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2016 का पुराना रिकॉर्ड: साल 2016 में नगरीय प्रशासन विभाग ने प्रदेश में 7,981 अवैध कॉलोनियों की पहचान की थी। इनमें से 3,155 कॉलोनियां केवल 16 नगर निगम क्षेत्रों में थीं। तब ग्वालियर में सबसे ज्यादा 696 और इंदौर में 636 अवैध कॉलोनियां चिह्नित हुई थीं। इसके बाद खंडवा में 338, भोपाल में 320 और जबलपुर में 224 कॉलोनियां थीं।
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वैध होने के बाद फिर बढ़ीं: तत्कालीन शिवराज सरकार ने साल 2022 तक की अवैध कॉलोनियों को वैध (Regularize) करने का फैसला लिया था। सरकार ने पुरानी कॉलोनियां वैध तो कर दीं, लेकिन उसके बाद से अब तक ढाई हजार से ज्यादा नई अवैध कॉलोनियां और खड़ी हो गईं।
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30 हजार पार का अनुमान: निकायों की लापरवाही के चलते पिछले कई सालों से डेटा अपडेट नहीं हुआ है। गैर-सरकारी और जानकारों के अनुमान के मुताबिक, आज की तारीख में पूरे मध्य प्रदेश में अवैध कॉलोनियों का ग्राफ 30 हजार के आंकड़े को पार कर चुका है। अकेले राजधानी भोपाल जिले में ही इनकी संख्या 600 से अधिक हो चुकी है।
3. ग्रीन बेल्ट, तालाब और सरकारी जमीनों पर भी कब्जा
अवैध कॉलोनियों का यह खेल सिर्फ सामान्य जमीनों तक सीमित नहीं है। भूमाफियाओं ने पर्यावरण और सरकारी संपत्तियों को भी नहीं बख्शा है:
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अपात्र कॉलोनियां: प्रदेश के 16 नगर निगमों में ऐसी 806 अपात्र अनधिकृत कॉलोनियां चिह्नित की गई हैं जो ग्रीन बेल्ट (Surrounding Greenery), तालाबों के किनारे, शासकीय भूमि (Govt Land) और सरकारी योजनाओं के लिए आरक्षित जमीनों पर अवैध रूप से बसा दी गई हैं।
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खेतों में कट रहे प्लॉट: नगर निगम और नगर पालिका की सीमाओं से सटे ग्रामीण क्षेत्रों के खेतों में यह धंधा सबसे ज्यादा फल-फूल रहा है। बिना टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) की मंजूरी और बिना निकाय से कॉलोनी विकास की अनुमति (Development Permission) लिए, सीधे खेतों में रास्ते बनाकर कम कीमत पर धड़ल्ले से प्लॉट बेचे जा रहे हैं।
इस पूरे गंभीर मामले पर जब विभाग के एसीएस (ACS) संजय दुबे से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने अवैध कॉलोनियों के आंकड़ों और जानकारी देने में कोई खास रुचि नहीं दिखाई, जो प्रशासनिक ढुलमुल रवैये को साफ बयां करता है।








