MP हाईकोर्ट का कड़ा फैसला: कलेक्टर ने नहीं चलाया दिमाग, 2 भाइयों पर लगी NSA निरस्त; ‘पुराने केस रासुका का आधार नहीं’
जबलपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: दो भाइयों पर लगाई गई NSA (रासुका) निरस्त; कहा- 'पुराने मामलों के आधार पर नहीं हो सकती कार्रवाई'

MP हाईकोर्ट का कड़ा फैसला: कलेक्टर ने नहीं चलाया दिमाग, 2 भाइयों पर लगी NSA निरस्त; ‘पुराने केस रासुका का आधार नहीं’
जबलपुर/भोपाल। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (जबलपुर हाईकोर्ट) ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA / रासुका) के तहत निरुद्ध दो सगे भाइयों की नजरबंदी के आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनिंद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए जबलपुर के जिला कलेक्टर द्वारा 6 जनवरी 2026 को पारित नजरबंदी आदेश को असंवैधानिक और यांत्रिक करार देते हुए निरस्त कर दिया।
हाईकोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु
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याचिकाकर्ता: राजेंद्र ठाकुर उर्फ छोटू और राजेश ठाकुर उर्फ भैया।
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पुराने आपराधिक मामले आधार नहीं: कोर्ट ने पाया कि पुलिस द्वारा नजरबंदी के लिए पेश किए गए 22 मामलों में से अधिकांश मामले वर्ष 2001 से 2015 के बीच के थे। वर्ष 2015 के बाद केवल दो मामले ही सामने आए थे।
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यांत्रिक तरीके से कानून का इस्तेमाल: युगलपीठ ने कहा कि पुराने और बासी मामलों के आधार पर रासुका जैसे असाधारण कानून का यांत्रिक (बिना सोचे-समझे) ढंग से प्रयोग नहीं किया जा सकता। आदेश जारी करते समय जिला कलेक्टर द्वारा स्वतंत्र विवेक (Mind) का प्रयोग नहीं दिखा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता निखिल तिवारी ने पैरवी की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के अमीना बेगम बनाम तेलंगाना राज्य मामले का संदर्भ दिया जबलपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: दो भाइयों पर लगाई गई NSA (रासुका) निरस्त; कहा- ‘पुराने मामलों के आधार पर नहीं हो सकती कार्रवाई’
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