MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: ‘सहमति से संबंध के बाद शादी न होने पर नहीं बनता दुष्कर्म या आत्महत्या के लिए उकसाने का केस’
MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: 'सहमति से संबंध के बाद शादी न होने पर नहीं बनता दुष्कर्म या आत्महत्या के लिए उकसाने का केस'

MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: ‘सहमति से संबंध के बाद शादी न होने पर नहीं बनता दुष्कर्म या आत्महत्या के लिए उकसाने का केस’
जबलपुर: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और नजीर बनने वाले फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि दो बालिग (वयस्क) आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बनाते हैं और बाद में किसी भी कारणवश उनकी शादी नहीं हो पाती या पुरुष शादी करने से इनकार कर देता है, तो केवल इसी एक आधार पर उसे दुष्कर्म (बलात्कार) या आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता.
हाई कोर्ट ने निरस्त की 10-10 साल की सजा
न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार वानी की एकलपीठ ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सीधी जिले के एक आरोपी को बड़ी राहत दी है:
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आरोपी दोषमुक्त: कोर्ट ने आरोपी पर लगे दुष्कर्म और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों को खारिज करते हुए उसे पूरी तरह दोषमुक्त कर दिया है.
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अधीनस्थ कोर्ट का फैसला पलटा: इसी के साथ हाई कोर्ट ने अधीनस्थ (निचली) अदालत द्वारा आरोपी को सुनाई गई 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा को भी पूरी तरह से निरस्त (रद्द) कर दिया है.MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: ‘सहमति से संबंध के बाद शादी न होने पर नहीं बनता दुष्कर्म या आत्महत्या के लिए उकसाने का केस’
फैसले की मुख्य बातें और कानूनी पहलू
हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान साफ किया कि:
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बालिगों की आपसी सहमति: जब दो वयस्क व्यक्ति अपनी मर्जी से किसी रिश्ते और शारीरिक संबंध में कदम बढ़ाते हैं, तो उस संबंध की कानूनी प्रकृति सहमति पर आधारित मानी जाती है.
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शादी का टूटना दुष्कर्म नहीं: यदि भविष्य में किन्हीं परिस्थितियों के कारण शादी नहीं हो पाती या लड़का मना कर देता है, तो अतीत में बनी सहमति को ‘धोखाधड़ी’ या ‘दुष्कर्म’ की श्रेणी में नहीं डाला जा सकता.
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आत्महत्या के लिए उकसाना (Abetment to Suicide): शादी से इनकार करने को सीधे तौर पर किसी को आत्महत्या के लिए मजबूर या प्रेरित करने का आधार (उकसाना) नहीं माना जा सकता, जब तक कि इसके पुख्ता सबूत न हों.
यह फैसला आने वाले समय में लिव-इन रिलेशनशिप और आपसी सहमति से बने संबंधों से जुड़े कई मामलों में एक मिसाल के तौर पर देखा जाएगा.MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: ‘सहमति से संबंध के बाद शादी न होने पर नहीं बनता दुष्कर्म या आत्महत्या के लिए उकसाने का केस’
— विधि एवं कानूनी डेस्क, विशेषांक








