पत्नी के प्रेम संबंध के बावजूद गुजारा भत्ता मिलेगा: एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

jabalpur High court

पत्नी के प्रेम संबंध के बावजूद गुजारा भत्ता मिलेगा: एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला महिला अगर पति के अलावा किसी और पुरुष से प्रेम करती है तो इसे तब तक अवैध संबंध नहीं माना जा सकता जब तक दोनों के बीच शारीरिक संबंध न हों. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी हाल ही में अपने एक फैसले में की है.

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक पुरुष ने अपनी पत्नी के खिलाफ याचिका दायर की थी. इसमें उसने तर्क दिया था कि चूंकि उसकी पत्नी किसी और से प्रेम करती है इसलिए वह भरण पोषण पाने की हकदार नहीं है. मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया ने इस दलील को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि अवैध संबंध तभी माना जाएगा जब शारीरिक संबंध हों.

कोर्ट ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 144(5) या दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 125(4) में यह स्पष्ट है कि यदि किसी महिला के अवैध संबंधों में होने के सबूत मिल जाते हैं, तभी उसे भरण पोषण राशि देने से इनकार किया जा सकता है.

कोर्ट ने कही ये बात

कोर्ट ने 17 जनवरी को सुनाए फैसले में कहा कि अवैध संबंध का मतलब शारीरिक संबंध से है. अगर महिला पति के अलावा किसी अन्य पुरुष के साथ बिना शारीरिक संबंध के प्रेम रखती है तो यह नहीं माना जा सकता कि वह अवैध संबंधों में है.

महिला के पति ने दायर की थी याचिका

कोर्ट में महिला के पति की ओर से पारिवारिक न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की गई थी, जिसमें उसे पत्नी को 4 हजार रुपये भरण पोषण देने का निर्देश दिया गया था. पुरुष का तर्क था कि वह वार्ड बॉय के रूप में काम करता है और सिर्फ 8 हजार रुपये कमाता है. कोर्ट को यह भी बताया गया कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत आदेश पारित होने के बाद से उसे पहले से ही ₹4,000 मिल रहे थे और इसलिए, सीआरपीसी की धारा 125 के तहत दिए गए ₹4,000 का अंतरिम भरण-पोषण अधिक है.

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अल्प आय की वजह से इनकार नहीं कर सकते

कोर्ट ने कहा कि पति की अल्प आय किसी महिला को भरण पोषण देने से इनकार करने का मानदंड नहीं हो सकती है. अगर किसी ने यह जानते हुए लड़की से विवाद किया कि वह अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है तो इसके लिए वह खुद जिम्मेदार है. अगर वह सक्षम व्यक्ति है तो उसे पत्नी को गुजारा भत्ता देने के लिए काम करना होगा. कोर्ट ने पति के उस दावे को भी खारिज कर दिया कि महिला ब्यूटी पार्लर चलाकर कमाई कर रही है. इस दावे पर व्यक्ति को उसकी पारिवारिक संपत्तियों से बेदखल किया गया है, इस पर कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक नोटिस सिर्फ एक दिखावा है.