MP Congress Crisis: जीतू पटवारी के फरमान को 21 जिलों में ठेंगा- मीनाक्षी नटराजन के मुद्दे पर नहीं हुआ प्रदर्शन; जिलाध्यक्षों को थमाया नोटिस
MP Congress Crisis: जीतू पटवारी के फरमान को 21 जिलों में ठेंगा- मीनाक्षी नटराजन के मुद्दे पर नहीं हुआ प्रदर्शन; जिलाध्यक्षों को थमाया नोटिस

MP Congress Crisis: जीतू पटवारी के फरमान को 21 जिलों में ठेंगा- मीनाक्षी नटराजन के मुद्दे पर नहीं हुआ प्रदर्शन; जिलाध्यक्षों को थमाया नोटिस
भोपाल ब्यूरो: मध्य प्रदेश कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। एक तरफ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ‘संगठन सृजन अभियान’ के जरिए पूरे प्रदेश में संगठन को मजबूत और धारदार बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत में उनके खुद के आदेशों की धज्जियां उड़ती दिखाई दे रही हैं। राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha Election) के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के विरोध में जीतू पटवारी द्वारा घोषित किया गया प्रदेशव्यापी प्रदर्शन कई जिलों में पूरी तरह फुस्स साबित हुआ।
नहीं माना पुतला दहन करने का आदेश; 21 जिलों में सन्नाटा
पूरा मामला कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की साख से जुड़ा हुआ था, लेकिन जिला स्तर के पदाधिकारियों ने इसे पूरी तरह हल्के में ले लिया:MP Congress Crisis: जीतू पटवारी के फरमान को 21 जिलों में ठेंगा- मीनाक्षी नटराजन के मुद्दे पर नहीं हुआ प्रदर्शन; जिलाध्यक्षों को थमाया नोटिस
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एनएसयूआई को दी थी जिम्मेदारी: प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 16 जून को अपने छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त करने के विरोध में पुतला दहन और उग्र प्रदर्शन करने का कड़ा जिम्मा सौंपा था।
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आदेश हुआ हवा-हवाई: हैरानी की बात यह है कि प्रदेश अध्यक्ष के इस साफ निर्देश के बावजूद मध्य प्रदेश के 21 जिलों में विरोध प्रदर्शन का कोई कार्यक्रम आयोजित ही नहीं हुआ। इन जिलों की एनएसयूआई और मुख्य कांग्रेस टीम घरों से बाहर तक नहीं निकली।
कांग्रेस संगठन सख्त; 3 दिन के भीतर मांगा स्पष्टीकरण
पार्टी के भीतर इस कदर सामने आई निष्क्रियता को पीसीसी (PCC) चीफ जीतू पटवारी और संगठन ने बेहद गंभीर अनुशासनहीनता माना है:
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जिलाध्यक्षों पर गिरी गाज: जिन 21 जिलों में पुतला दहन और विरोध प्रदर्शन के आदेश की नाफरमानी की गई, वहां के संबंधित जिलाध्यक्षों को संगठन प्रभारी द्वारा कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी कर दिया गया है।
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3 दिन का अल्टीमेटम: इन सभी जिलाध्यक्षों को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिया गया है कि वे तीन दिन के भीतर लिखित में स्पष्टीकरण दें कि आखिर प्रदेश नेतृत्व के आदेश को जमीन पर क्यों नहीं उतारा गया। संतोषजनक जवाब न मिलने पर कई जिलाध्यक्षों की कुर्सी भी जा सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद बीजेपी को भी कांग्रेस पर चुटकी लेने का मौका मिल गया है, वहीं राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि जीतू पटवारी की प्रदेश कार्यकारिणी और जिला स्तर के नेताओं पर पकड़ कमजोर होती जा रही है।








