MP में मंडराया ये बड़ा संकट, मुख्यमंत्री चौहान ने बुलाई आपात बैठक

मध्यप्रदेश में अगस्त महीने की कम बारिश के कारण सूखे के हालात उत्पन्न हो गए हैं। इससे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान काफी चिंता में हैं। उन्होंने कहा, “प्रदेश के अन्न दाता जब परेशान होते हैं, तो मैं शांति से नहीं बैठ सकता।”

चौहान जी ने चित्रकूट में हुए ‘जन आशीर्वाद कार्यक्रम’ से लौट कर तत्काल मंत्रालय में एक बैठक बुलाई, जिसमें प्रदेश के सभी प्रमुख विभागों के सचिव मौजूद थे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सूखे के इस बढ़ते हुए संकट को कैसे दूर किया जा सकता है, इस पर विचार करना था।

मुख्यमंत्री ने किसानों को ईश्वर से प्रार्थना करने का आग्रह किया, ताकि प्रदेश में जल्द ही बारिश हो सके। इसी प्रयास में वे कल उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में पूजा और प्रार्थना के लिए जा रहे हैं, जिससे प्रदेश में बारिश की आशा बढ़ सके और किसानों की परेशानियों को राहत मिल सके।

बिजली की खपत बढ़ गई: सीएम
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण किसान चिंतित है. उन्होंने कहा कि किसान चिंता न करें, सरकार हर संकट से निपटने के लिए उनके साथ में है. उन्होंने कहा कि बारिश कम होने के कारण बिजली की मांग बढ़ गई है. बिजली के इंतेजाम करने के लिए भी में दिन रात एक कर रहा हूं. पहले 7 मेगावाट की आवश्यकता थी जो बढ़कर 15000 मेगावाट की मांग बढ़ गई है, मैने परसों खरीदने की कोशिश की पूरे हिंदुस्तान में मुझे बिजली नही मिली, अपने प्रदेश ही नहीं सभी जगह सूखे जैसा संकट है. पर्याप्त बिजली की व्यवस्था की कोशिश कर रहा हूं.

किसानों को फसल उत्पादन के पैटर्न को बदलना होगा
सीएम ने कहा, “फसल नुकसान से बचने और खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए किसानों को फसल उत्पादन के पैटर्न को बदलना होगा. परंपरागत फसलों के साथ-साथ व्यावसायिक फसलों का भी उत्पादन करना आवश्यक है, ताकि किसानों की आर्थिक स्थिति सुधार हो सके. अभी हम खरीफ की फसल में अधिकतर सोयाबीन और धान ही लगाते है और कई बार एक फसल पर ही संकट आने से किसान को बहुत नुकसान हो जाता है. उन्होंने कहा कि अलग अलग फसलों की किस्मों से किसानों को अधिक से अधिक लाभ हो सके.”‘इसके लिए आईटीसी द्वारा 7000 एकड़ में तुलसी, अश्वगंधा, कलौंजी की खेती की गई है. उन्होंने यह भी कहा कि खेती पर आधारित उद्योग धंधे लगाने का सरकार निरंतर प्रयास कर रही है, ताकि किसानों को भी अपनी फसलों का अच्छा दाम मिले और स्थानीय नागरिकों को रोजगार उपलब्ध हो सके.’

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