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MP में जल्द ही बड़ी प्रशासनिक सर्जरी, 22 जिलों के कलेक्टर 20 के एसपी और 4 संभागों के कमिश्नर बदले जाएंगे

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भोपाल। मध्यप्रदेश में जल्द ही बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की सुगबुगाहट तेज हो गई है। करीब 22 जिलों के कलेक्टर 20 के एसपी और 6 संभागों के कमिश्नर सहित प्रमुख अधिकारियों के बदले जाने की संभावना है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मोहन मंत्रिमंडल में मंत्रियों को विभागीय जिम्मेदारी मिलने के बाद यह सर्जरी तय है।

भाजपा ने कई जिलों के कलेक्टर और एसपी की शिकायत की थी

विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने कई जिलों के कलेक्टर और एसपी की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए थे। इनमें नरसिंहपुर के कलेक्टर रिजु बाफना, रतलाम कलेक्टर भास्कर लक्षकार, शहडोल कलेक्टर और भिंड एसपी संजीव श्रीवास्तव और निवाड़ी के एसपी अंकित जायसवाल के खिलाफ भाजपा ने चुनाव आयोग से शिकायत की  थी।  भाजपा का आरोप था कि यह अधिकारी चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवारों के लिए काम कर रहे है। ऐसे में अब लोकसभा चुनाव से पहले ऐसे अफसरों की जिलों से विदाई तय मानी जा रही है और ऐसे अफसर आने वाले समय में लूफ लाइन मेंं नजर आएंगे।

अफसरों के नाम भी सुझाने शुरू कर दिये

जिलों में डीएम व एसपी बदले जाने हैं उनके लिये बने मंत्रियों व पार्टी के बड़े नेताओं ने अपनी पसंद के अफसरों के नाम भी सुझाने शुरू कर दिये हैं। वहीं मंत्रियों ने अपने स्टाफ के लिये भी अधिकारियों की तलाश शुरू कर दी है। ऐसी संभावना है कि जल्दी ही मंत्रियों के विभाग बंटते ही विभिन्न जिलों में पदस्थ अधिकारियों को व्यापक रूप से बदला जायेगा।

लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर फेरबदल

हालाांकि यह फेरबदल लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। ऐसी संभावना है कि मार्च से लोकसभा की प्रक्रिया शुरू हो जायेगी। इसीलिये सरकार भी चाहती है कि जिन नये कलेक्टर व एसपी को जिलों में पदस्थ किया जाना हैं वहां वह नये अधिकारी पूरा भूगोल समझ सकें व नई जमावट भी कर सकें।

अधिकारियों की फील्ड जमावट तय करेंगे

भोपाल के सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव जल्दी ही अपने विश्वस्त मंत्रियों व अधिकारियों के साथ बैठकर जिलों के अधिकारियों की फील्ड जमावट तय करेंगे। हालांकि अभी मुख्यमंत्री डा. यादव मंत्रीमंडल बनाने के बाद विभाग वितरण में लगे है इसीलिये अधिकारियों की तैनाती में टाइम लग रहा है। कुल मिलाकर मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव का प्रयास यह  है कि जिलों में जो अधिकारी भेजे जाये, वह लोकप्रिय और विवादरहित है और त्वरित स्तर पर आम लोगों के काम करें जिससे सरकार की छवि बेहतर रहे।

तीन वर्ष से एक स्थान पर पदस्थ कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक दायरे में

मार्च के पहले पखवाड़े में लोकसभा चुनाव की घोषणा प्रस्तावित है। इसे देखते हुए चुनाव आयोग ने प्रशासनिक व्यवस्था बनाने के निर्देश राज्यों को दिए हैं। इसमें 30 जून 2024 की स्थिति में तीन वर्ष से एक स्थान पर पदस्थ कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक से लेकर निर्वाचन कार्यों से जुड़े अधिकारियों को हटाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए 31 जनवरी तक का समय दिया गया है।

बैतूल कलेक्टर अमनबीर सिंह बैंस इस परिधि में आ रहे हैं। जून 2024 के पहले उनके बैतूल में पदस्थ रहते तीन वर्ष से अधिक हो जाएंगे। इसी तरह कुछ अन्य अधिकारी हैं, जिनको लेकर निर्णय होना है। यही स्थिति पुलिस अधीक्षकों की भी है। आयोग के निर्देश पर सामान्य प्रशासन और गृह विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। वहीं, मुख्य सचिव को लेकर निर्णय मुख्यमंत्री को करना है।

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ 1989 बैच के अधिकारी अनुराग जैन की मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव से भेंट हो चुकी है। इसके बाद से यह अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि उन्हें वापस बुलाया जा सकता है। शिवराज सरकार में भी इस तरह की बात चली थी पर केंद्र सरकार उनकी सेवाएं लौटाने के लिए तैयार नहीं हुई।

यदि जैन को मुख्य सचिव बनाना है तो उनकी सेवाएं वापस लेने के लिए केंद्र सरकार अनुरोध करना होगा। जैन कमल नाथ सरकार में अपर मुख्य सचिव वित्त थे और फिर 2019 में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले गए थे।

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