Latestव्यापार

Modi Govt Big Decision: पेट्रोल की महंगाई से मिलेगी बड़ी राहत- मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला- 22% से 30% इथेनॉल वाले पेट्रोल पर टैक्स हुआ ‘शून्य’; देखें पूरी इनसाइड स्टोरी

Modi Govt Big Decision: पेट्रोल की महंगाई से मिलेगी बड़ी राहत- मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला- 22% से 30% इथेनॉल वाले पेट्रोल पर टैक्स हुआ 'शून्य'; देखें पूरी इनसाइड स्टोरी

नई दिल्ली-ब्यूरो: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भारी भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की अस्थिर कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी को राहत देने के लिए एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है।

Modi Govt Big Decision: पेट्रोल की महंगाई से मिलेगी बड़ी राहत- मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला- 22% से 30% इथेनॉल वाले पेट्रोल पर टैक्स हुआ ‘शून्य’; देखें पूरी इनसाइड स्टोरी

वित्त मंत्रालय ने एक नई और विशेष अधिसूचना (Notification) जारी कर उच्च इथेनॉल मिश्रण (22% से 30%) वाले पेट्रोल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) को पूरी तरह से खत्म यानी ‘शून्य’ कर दिया है। सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत विदेशी कच्चे तेल पर अपनी निर्भरता को घटाकर देश को ‘हरित ऊर्जा’ (Green Energy) के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है।

आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि सरकार के इस मास्टरस्ट्रोक का आपकी जेब, देश के किसानों और गाड़ियों के इंजन पर क्या असर होने वाला है।

1. सरकार ने पेट्रोल पर क्या नई छूट दी है और टाइमिंग क्यों है खास?

वित्त मंत्रालय की आधिकारिक गाइडलाइन के अनुसार, 22 प्रतिशत से लेकर 30 प्रतिशत तक इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल— यानी E22, E25, E27 और E30 पर अब सरकार ₹1 भी एक्साइज ड्यूटी नहीं वसूलेगी। देश के बायोफ्यूल प्रोग्राम के तहत E20 से ऊपर के ब्लेंड पर दिया गया यह अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय प्रोत्साहन (Financial Incentive) है।

अहम टाइमिंग: गौरतलब है कि मई के दूसरे पखवाड़े में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर का तेज उछाल आया था। इससे पहले मार्च में भी सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपये के सालाना राजस्व का नुकसान सहते हुए पेट्रोल-डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर की ड्यूटी घटाई थी। अब इस नए टैक्स कट से कंपनियों को ज्यादा इथेनॉल वाला पेट्रोल बाजार में उतारने में बड़ी मदद मिलेगी।

2. क्या इससे पेट्रोल की कीमतें कम होंगी और ग्राहकों को सीधा फायदा मिलेगा?

यह हर आम उपभोक्ता का सबसे बड़ा सवाल है। पेट्रोलियम मंत्रालय के मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, इथेनॉल की औसत खरीद लागत (GST और ट्रांसपोर्टेशन सहित) 71.32 रुपये प्रति लीटर है, जो वर्तमान में रिफाइंड पेट्रोल की लागत से थोड़ी अधिक हो चुकी है। इसलिए शुरुआत में तेल कंपनियों के लिए खुदरा कीमतों में बहुत बड़ी कटौती करना एक चुनौती जरूर है।

E85 का बड़ा उदाहरण: हालांकि, सरकार ने हाल ही में फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए 85% इथेनॉल वाला ‘E85’ ईंधन लॉन्च किया है। सार्वजनिक क्षेत्र के 48 पेट्रोल पंपों पर यह विशेष ईंधन सामान्य E20 पेट्रोल की तुलना में 20 रुपये प्रति लीटर सस्ता बेचा जा रहा है। साफ है कि जैसे-जैसे ब्लेंडिंग का दायरा बढ़ेगा, ग्राहकों को सीधे तौर पर सस्ता फ्यूल मिलने का रास्ता साफ होगा।

3. पुरानी गाड़ियों के इंजन को नुकसान तो नहीं? SIAM ने दूर किया डर

कई वाहन मालिकों के मन में यह आशंका रहती है कि क्या ज्यादा इथेनॉल (22% से 30%) वाले पेट्रोल से उनकी पुरानी कार या बाइक के इंजन और माइलेज पर बुरा असर पड़ेगा? इस पर वाहन निर्माता कंपनियों के संगठन SIAM (सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स) ने स्थिति साफ की है:

  • सुरक्षा को कोई खतरा नहीं: सियाम के मुताबिक, ज्यादा इथेनॉल वाले पेट्रोल से पुरानी गाड़ियों के माइलेज में 1-2% की थोड़ी बहुत कमी जरूर आ सकती है, लेकिन इससे गाड़ी की सुरक्षा या इंजन की परफॉर्मेंस पर कोई बुरा या खतरनाक असर नहीं पड़ेगा।
  • फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिलें: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी इन चिंताओं को खारिज करते हुए कहा है कि देश में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाली मोटरसाइकिलें पेट्रोल और इथेनॉल दोनों पर समान दक्षता के साथ चल सकती हैं।

4. देश की अर्थव्यवस्था और अन्नदाताओं को कैसे मिलेगा ‘महा-बूस्ट’?

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, भारत आज भी अपनी जरूरत का 87% जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) विदेशों से आयात करता है। सरकार के इस नीतिगत फैसले से देश को तीन बड़े फायदे होंगे:

  • विदेशी मुद्रा की बचत: महंगे क्रूड ऑयल का आयात घटने से भारत का अरबों डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार देश के भीतर ही सुरक्षित रहेगा।
  • किसानों की चांदी: ईंधन आयात पर खर्च होने वाला पैसा अब सीधे तौर पर देश के गन्ना किसानों, मक्का उत्पादकों, कृषि क्षेत्र और ग्रामीण युवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने में इस्तेमाल होगा।
  • प्रदूषण से मुक्ति: इथेनॉल एक बेहद स्वच्छ और ‘ग्रीन फ्यूल’ है, जिसके इस्तेमाल से कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी।

5. लक्ष्य से आगे चल रहा है भारत; BIS ने लागू किए कड़े मानक

भारत का इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) तय समय सीमा से काफी आगे चल रहा है। पहले सरकार ने पेट्रोल में 20% इथेनॉल (E20) मिलाने का लक्ष्य साल 2030 रखा था, जिसे बाद में घटाकर 2025-26 किया गया। आंकड़ों की जुबानी देखें तो:

  • 2022-23: 12.06% ब्लेंडिंग का लक्ष्य पूरा।
  • 2023-24: 14.60% ब्लेंडिंग हासिल की।
  • 28 फरवरी 2025 तक: देश ने 17.98% ब्लेंडिंग का शानदार और ऐतिहासिक आंकड़ा छू लिया था।

क्वालिटी की फुल गारंटी: ग्राहकों को घटिया ईंधन न मिले, इसके लिए 15 मई 2026 से ही भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने E22 से E30 ब्लेंड वाले पेट्रोल के लिए नए कड़े क्वालिटी स्टैंडर्ड्स (IS 19850:2026) देश भर में लागू कर दिए हैं। इसमें ऑक्टेन रेटिंग और सल्फर की सीमा को कड़ाई से तय किया गया है।

6. ‘बिना इथेनॉल’ वाले सादे पेट्रोल की मांग पर सरकार की दो टूक

इथेनॉल मिश्रण को लेकर कुछ समय पहले विवाद भी देखने को मिला था। सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में E20 ईंधन लागू करने के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका को सिरे से खारिज कर दिया था। इसके बाद कुछ उपभोक्ता संगठनों ने मांग की थी कि पेट्रोल पंपों पर बिना इथेनॉल वाला सादा पेट्रोल भी मिलना चाहिए।

हालांकि, केंद्र सरकार ने इस मांग को साफ तौर पर ठुकरा दिया है। सरकार का कहना है कि यह फैसला देश हित और किसानों के आर्थिक फायदे को सर्वोपरि रखकर लिया गया है, इसलिए पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं है।

Back to top button