पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा को बड़ी राहत: लोकसभा में बंद हो सकता है महाभियोग का मामला, मिलेंगे पेंशन और सरकारी लाभ
नई दिल्ली: दिल्ली स्थित सरकारी आवास से बेहिसाब कैश मिलने के मामले में घिरे इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग (Impeachment) का चैप्टर अब हमेशा के लिए क्लोज हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, उनके पद से इस्तीफा दे देने के कारण लोकसभा में अब उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव नहीं लाया जाएगा। संसद के आगामी सत्र में इसे औपचारिक रूप से बंद किया जा सकता है।
महाभियोग न आने से जस्टिस वर्मा को क्या-क्या फायदे?
यदि संसद में महाभियोग की प्रक्रिया के जरिए उन्हें पदमुक्त नहीं किया जाता है, तो उन्हें पूर्व जजों की तरह पूरी पेंशन, सरकारी आवास, सुरक्षा और अन्य सभी सुविधाएं मिलती रहेंगी। संसद में प्रस्ताव न आने से पूर्व जस्टिस से जुड़े अन्य वित्तीय खुलासे और घर से बरामद पैसों के स्रोत संबंधी डेटा सार्वजनिक होने की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
क्या था पूरा मामला और स्टोररूम में कैश का सच?
दिल्ली के 30, तुगलक क्रिसेंट स्थित जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के स्टोररूम में आग लगी थी। दमकलकर्मियों और पुलिस अधिकारियों ने मौके पर ₹500 के अधजले, गीले और बिखरे हुए नोटों का अंबार देखा था।लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गठित सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली 3-सदस्यीय समिति ने 9 गवाहों और 14 सबूतों के आधार पर वर्मा को दोषी पाया।
कमेटी के मुख्य निष्कर्ष
स्टोररूम भले ही मुख्य हिस्से से अलग था, पर आवासीय परिसर के अंदर ही था और उसके लॉक खराब होने की जानकारी जस्टिस वर्मा को थी।घटना के बाद करेंसी जब्त न करना, पंचनामा न बनाना और स्टोररूम को तुरंत सील न करके सफाई कराया जाना एक बड़ा ‘मैटेरियल लैप्स’ (Material Lapse) माना गया।
FIR दर्ज न होने पर उठ रहे सवाल
सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट दोनों ने ही इस मामले में पूर्व जस्टिस के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की याचिकाओं को खारिज कर दिया है। यानी पूरे प्रकरण में फिलहाल उनके खिलाफ कोई आपराधिक एफआईआर दर्ज नहीं है। पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा को बड़ी राहत: लोकसभा में बंद हो सकता है महाभियोग का मामला, मिलेंगे पेंशन और सरकारी लाभ
वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने एक कार्यक्रम के दौरान इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी नेता या मंत्री के घर से इस तरह बेहिसाब कैश मिलता, तो क्या उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज नहीं की जाती?
संसद में 200 सांसदों के हस्ताक्षर वाले इस महाभियोग प्रस्ताव का बंद होना पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है।













