
NCW की केंद्र सरकार को बड़ी सिफारिश: 730 दिन की चाइल्ड केयर लीव हो जेंडर-न्यूट्रल, पिता को भी मिले बराबरी का हक; 37 अहम सुझाव
संवाददाता (नेशनल डेस्क): राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने देश में मातृत्व, पितृत्व और चाइल्ड केयर से जुड़े कानूनों में व्यापक बदलाव लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार को 37 अहम सिफारिशें सौंपी हैं। आयोग ने यह रिपोर्ट कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को भेजी है। इन सिफारिशों का मुख्य उद्देश्य शेयर-पैरेंटिंग (साझा देखभाल), सार्वभौमिक मातृत्व सुरक्षा और परिवार के अनुकूल कार्यस्थल माहौल को बढ़ावा देना है।
730 दिन की चाइल्ड केयर लीव (CCL) बने जेंडर-न्यूट्रल
राष्ट्रीय महिला आयोग ने बच्चों की देखभाल में पिता की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई दूरगामी सुझाव दिए हैं:
साझा लीव पूल: मौजूदा 730 दिनों की चाइल्ड केयर लीव को जेंडर-न्यूट्रल बनाते हुए दोनों कामकाजी माता-पिता के बीच 365-365 दिन में बांटने या साझा लीव पूल बनाने की सिफारिश की गई है।
60:40 का अनुपात: 0 से 2 साल के बच्चों की देखभाल के लिए प्राथमिक और सेकेंडरी केयरगिवर के बीच 60:40 के अनुपात में जिम्मेदारी साझा करने का प्रस्ताव है।
तीसरे बच्चे को भी दायरा: मौजूदा दो बच्चों की सीमा की समीक्षा करते हुए तीसरे बच्चे के लिए भी चरणबद्ध तरीके से CCL लागू करने का सुझाव है।
निजी क्षेत्र और असंगठित वर्ग के लिए बड़े बदलाव
अनिवार्य पेड पैटरनिटी लीव: निजी और असंगठित क्षेत्र में पिता के लिए पेड पैटरनिटी लीव (सवेतन पितृत्व अवकाश) को कानूनी अधिकार बनाने की सिफारिश की गई है।
निजी क्षेत्र में भी CCL लागू हो: प्राइवेट सेक्टर में भी कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से (पहले बड़ी कंपनियों फिर MSMEs में) CCL देने का प्रस्ताव है। इसके बदले नियोक्ताओं को टैक्स छूट और वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा।
गिग और असंगठित वर्ग की महिलाएं: गिग, प्लेटफॉर्म और असंगठित क्षेत्र की कामकाजी महिलाओं के लिए Maternity & Childcare Fund बनाने की सिफारिश की गई है।
सरोगेसी, गोद लेने और नर्सिंग माताओं के लिए नया प्रस्ताव
26 सप्ताह की मैटरनिटी लीव: गोद लेने और सरोगेसी के जरिए मां बनने वाली महिलाओं के लिए छुट्टी की अवधि 12 सप्ताह से बढ़ाकर जैविक माताओं के समान 26 सप्ताह करने का प्रस्ताव है।
30 मिनट का नर्सिंग ब्रेक: कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए नर्सिंग ब्रेक को 15 मिनट से बढ़ाकर 30 मिनट करने और लैक्टेशन रूम अनिवार्य बनाने की सिफारिश है।
5 लाख क्रेच सीटें (2030 तक): ‘नेशनल चाइल्डकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन’ के तहत 2030 तक देश में 5 लाख क्रेच सीटें तैयार करने का लक्ष्य रखने का सुझाव दिया गया है।
मातृत्व के कारण करियर और प्रमोशन पर न पड़े असर
आयोग ने स्पष्ट किया है कि चाइल्ड केयर लीव लेने वाली महिलाओं को कम प्रतिबद्ध कर्मचारी मानने की सोच में बदलाव की जरूरत है। करियर ब्रेक का असर महिलाओं के प्रमोशन, वेतन वृद्धि और पेंशन पर नहीं पड़ना चाहिए। इसके साथ ही भेदभाव करने वाले नियोक्ताओं पर कड़े जुर्माने और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने की भी बात कही गई है।







