भोपाल। प्रदेश में मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली पीएमटी में घोटाला 2006 से सामने आया। एसटीएफ ने वर्ष 2006 से 2013 तक सरकारी और निजी मेडिकल चयन से संबंधित पीएमटी में दो आपराधिक प्रकरण में 186 अभ्यर्थियों को आरोपी बनाया था। डीमेट से संबंधित एसटीएफ में कोई प्रकरण दर्ज नहीं है। यह गृह मंत्री बाला बच्चन ने प्रताप ग्रेवाल, कुणाल चौधरी और हर्ष गेहलोत के सवाल के लिखित जवाब में कही।
गृह मंत्री ने तीनों विधायकों के सवाल के जवाब में बताया कि जिन 186 अभ्यर्थियों को आरोपी बनाया गया, उनकी सूची एसटीएफ ने पहले व्यापमं को नहीं भेजी। हालांकि, वर्ष 2012 की परीक्षा में फर्जीवाड़े की जानकारी चाहे जाने पर व्यापमं के प्रतिवेदन के आधार पर कार्रवाई की गई।
व्यापमं ने पहले परीक्षा की जांच कर प्रतिवेदन गृह विभाग को न भेजते हुए सीधे एसटीएफ को भेजा था, इस पर पुलिस प्रकरण दर्ज हुआ था। गृहमंत्री ने कहा कि सीबीआई को सुपुर्द किए गए व्यापमं संबंधी अपराधों में तत्कालीन एसआईटी अपराधवार समीक्षा करती थी और सीधे विवेचक को निर्देश देती थी। विवेचक निर्देशों को डायरी में शामिल करते थे।
नौ जुलाई 2015 को प्रकरण सीबीआई को सौंप दिए गए। इस मामले में जब पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा से मीडिया ने सवाल किया तो उन्होंने कहा कि मैंने पढ़ा है, लेकिन वे दोषी तो किसी को बता ही नहीं रहे हैं। अगर कुछ है तो उसे सामने लाना चाहिए।
चार हजार से ज्यादा थे आरोप
व्यापमं घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपने से पहले चार हजार 46 आरोपी थे, जिनमें से तीन हजार 63 को गिरफ्तार किया गया था। 983 बाकी थे, इनमें 27 मृतक भी शामिल थे। सीबीआई को सौंपे 212 मामलों में से पांच पर न्यायालय का फैसला हो चुका है।

