फूड डिलीवरी ऐप्स के बीच छिड़ी ‘लंच वॉर’: स्विगी-ज़ोमैटो का ₹200 वाली ‘किफायती थाली’ पर फोकस, ऑफिस गोअर्स की मौज
फूड डिलीवरी ऐप्स के बीच छिड़ी 'लंच वॉर': स्विगी-ज़ोमैटो का ₹200 वाली 'किफायती थाली' पर फोकस, ऑफिस गोअर्स की मौज
फूड डिलीवरी ऐप्स के बीच छिड़ी ‘लंच वॉर’: स्विगी-ज़ोमैटो का ₹200 वाली ‘किफायती थाली’ पर फोकस, ऑफिस गोअर्स की मौज
नई दिल्ली: अगर आप भी ऑफिस में लंच के समय फूड डिलीवरी ऐप्स पर 400-500 रुपये का भारी-भरकम बिल देखकर अपना मन मार लेते थे, तो आपके लिए एक बड़ी खुशखबरी है। स्विगी (Swiggy) और ज़ोमैटो (Zomato) जैसी दिग्गज फूड डिलीवरी कंपनियां अब आपका रोज़ का लंच ऑर्डर हथियाने के लिए एक नई जंग की शुरुआत कर चुकी हैं। कंपनियों का पूरा फोकस अब महंगे या फैंसी खाने पर नहीं, बल्कि सिर्फ 200 रुपये के बजट वाली ‘वैल्यू मील’ (Value Meal) यानी किफायती थाली पर है। इन कंपनियों का सीधा मकसद ऑनलाइन खाना मंगाने को किसी ‘खास मौके’ की बजाय आपकी ‘रोज़मर्रा की आदत’ बनाना है।
हर दिन के लंच पर कंपनियों की नजर; ढाबा संस्कृति को टक्कर
बाजार के जानकारों का मानना है कि इस नई रणनीति से फूड डिलीवरी कंपनियां आपके घरेलू और ऑफिस के बजट में अपनी पक्की जगह बनाना चाहती हैं।
-
आदत बदलने की तैयारी: बाजार पर नजर रखने वाली फर्म ‘डेटम इंटेलिजेंस’ के संस्थापक सतीश मीना का कहना है कि इन कंपनियों का इरादा अब सिर्फ आपसे कभी-कभार ऑर्डर करवाने का नहीं है। वे चाहती हैं कि आप अपने ऑफिस के रोज़ के लंच के लिए पूरी तरह उन पर निर्भर हो जाएं।
-
₹200-₹250 का मैजिक नंबर: इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कोई भी कामकाजी युवा या बजट ग्राहक ऑनलाइन खाना तभी मंगाएगा, जब डिलीवरी चार्ज, पैकेजिंग और सारे टैक्स मिलाकर फाइनल बिल 200 से 250 रुपये के बीच बैठे। अगर यह दाम आसपास के लोकल ढाबे या रेस्तरां से बहुत ज्यादा महंगा होगा, तो लोग इसे स्किप कर देंगे। फूड डिलीवरी ऐप्स के बीच छिड़ी ‘लंच वॉर’: स्विगी-ज़ोमैटो का ₹200 वाली ‘किफायती थाली’ पर फोकस, ऑफिस गोअर्स की मौज
फास्ट-फूड और रेस्तरां भी मेन्यू बदलने को मजबूर
ग्राहकों की इस बड़ी डिमांड और फूड ऐप्स के दबाव को देखते हुए अब बड़ी-बड़ी फास्ट-फूड चेन और नामचीन रेस्तरां भी अपने मेन्यू में बदलाव कर रहे हैं। वे खास तौर पर ऐसे कॉम्बो और थाली डिजाइन कर रहे हैं जो पॉकेट-फ्रेंडली (किफायती) हों और जिन्हें आसानी से ऑफिस में लंच के तौर पर खाया जा सके।
इस नई ‘प्राइस वॉर’ (कीमतों की जंग) का सीधा फायदा ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों, स्टूडेंट्स और बजट में रहने वाले ग्राहकों को मिलने वाला है, जिन्हें अब कम पैसों में पेट भर अच्छे खाने के विकल्प मिलेंगे।







