अजब गजब

Lockdown : भालुओं ने दिखाया करतब, डस्टबिन को उठा-उठाकर…

नई दिल्ली। कोरोना वायरस से देश में संकट की स्थिति है। इस वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने लॉकडाउन को 3 मई तक के लिए बढ़ा दिया है। लोग अपने घरों में बंद रहकर न केवल संक्रमण को फैलने से रोक रहे हैं, बल्कि एक दूसरे को इससे बचने के लिए जागरूक भी कर रहे हैं।
हालांकि, लॉकडाउन से मानव जाति के साथ-साथ वन्य जीव जंतुओं पर भी व्यापक असर पड़ा है। उन्हें भी खाने-पीने की चीजों के लिए मोहताज होना पड़ रहा है। ऐसे में जंगली जानवर खाने-पीने की चीजों के लिए आसपास के इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। कई अवसरों पर खाना न मिलने की वजह से इन जानवरों को हिंसक भी होते देखा गया है।

इसी कड़ी में सोशल मीडिया पर एक वीडियो बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें साफ़ देखा जा रहा है कि एक भालू मंदिर के बाहर रखे डस्टबिन में खाने की चीजें ढ़ूढ रहा है और जब उसे कुछ नहीं मिलता है,
तो वह डस्टबिन को उठा-उठाकर जोर-जोर से पटकने लगता है। ऐसा वह एक बार नहीं, बल्कि बार-बार करता है। एक और भालू मंदिर के परिसर में दिख रहा है, जो कुछ खाने-पीने की चीजें ढ़ूंढने के फिराक में है, लेकिन उसे भी कुछ हाथ नहीं लगता है। जब वह मंदिर परिसर में होता है तो पहला भालू डस्टबिन लेकर उसके पास भी पंहुच जाता है और वहां भी जोर-जोर से डस्टबिन पटकने लगता है, जिसे देखकर दूसरा भालू विचलित हो जाता है।



इस वीडियो को प्रवीण कासवान ने शेयर की है

इस वीडियो को वन अधिकारी प्रवीण कासवान ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इसके कैप्शन में उन्होंने लिखा है- कोरोना वायरस महामारी के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश में लॉकडाउन की स्थिति है। सभी मंदिर बंद हैं। ऐसे में सुस्त भालुओं की टोली को खाने के लिए कुछ नहीं मिल रहा है। वे आते हैं और खाली हाथ लौट जाते हैं। इन्हें खाना न मिले तो कभी-कभी ये हिंसक भी हो जाते हैं। आप देख सकते हैं कि छत्तीसगढ़ के एक मंदिर में दो सुस्त भालू कैसे डस्टबिन के साथ खेल रहे हैं। इसलिए सलाह दी जाती है कि जंगली जानवरों को खाना नहीं देना चाहिए।

इस वीडियो को 14 हजार से अधिक लोग देख चुके हैं

प्रवीण कासवान के इस वीडियो को अब तक 14 हजार से अधिक लोग देख चुके हैं। वहीं, इस वीडियो को 1 हजार से अधिक लोगों ने लाइक और लगभग 234 लोगों ने रीट्वीट किया है। वहीं, 57 लोगों ने अब तक कमेंट किए हैं, जिसमें उन्होंने प्रवीण कासवान की सलाह को सही ठहराया है।

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