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‘जैसा अन्न, वैसा मन’: रसोईघर में बोली गई ये एक बात आपके पूरे परिवार की बिगाड़ सकती है सेहत, आज ही जान लें ये वास्तु नियम

‘जैसा अन्न, वैसा मन’: रसोईघर में बोली गई ये एक बात आपके पूरे परिवार की बिगाड़ सकती है सेहत, आज ही जान लें ये वास्तु नियम, भारतीय सनातन परंपरा और वास्तु शास्त्र में रसोईघर को केवल खाना पकाने की जगह नहीं, बल्कि घर की ‘ऊर्जा का केंद्र’ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार “जैसा अन्न, वैसा मन”-अर्थात जिस भाव से भोजन पकाया जाता है, उसका सीधा असर भोजन करने वालों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोईघर में खाना बनाते समय निम्नलिखित विशेष बातों और नियमों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है:

1. मन का भाव और मानसिक स्थिति (Emotional State)

  • गुस्से और तनाव से बचें: वास्तु मान्यताओं के अनुसार, गुस्सा, चिड़चिड़ापन या तनाव में बनाया गया भोजन घर में नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) को बढ़ावा देता है। भोजन बनाते समय मन का शांत और प्रसन्न होना जरूरी है।

  • कटु वाणी व बहस से दूर रहें: रसोईघर में ऊंची आवाज में बोलना, किसी से झगड़ा करना या अपशब्दों का प्रयोग करना वर्जित है। खाना बनाते वक्त आसपास का माहौल सहज, शांत और सकारात्मक होना चाहिए।

  • मन अशांत होने पर लें थोड़ा ठहराव: यदि आप किसी बात से परेशान हैं या स्ट्रेस में हैं, तो तुरंत पकाने के बजाय कुछ पल ठहरें। अपनी आस्था अनुसार ईश्वर का ध्यान करें, मंत्रों का जाप करें या कोई मधुर भजन सुनें, जिससे मन शांत हो सके।

 2. जल और अग्नि का संतुलन (Vastu & Elements)

  • पानी के पात्र की स्वच्छता: वास्तु में जल तत्व को ऊर्जा को अवशोषित करने वाला माना गया है। रसोई में पीने और पकाने के पानी के बर्तन/पात्र को हमेशा साफ, ढककर और ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में व्यवस्थित रखना चाहिए।

  • सकारात्मक सोच के साथ भोजन बनाएं: जल और अन्न दोनों ही व्यक्ति के विचारों की तरंगों (Vibrational Frequencies) को तुरंत सोख लेते हैं। इसलिए सकारात्मक और शुद्ध भाव से बनाया गया अन्न परिवार के सदस्यों में शांति और सद्भाव लाता है।

3. परोसने की कला और पारिवारिक मिठास

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