Katni Task Force Meeting: कटनी में धरमपुरा और पाली जलाशय परियोजनाओं को लेकर कलेक्टर सख्त; गिदुरहा बांध के वन सीमा विवाद की जांच करेगी राज्य स्तरीय समिति। जिले के विकास कार्यों को गति देने और वन भूमि से जुड़े सालों पुराने विवादों को सुलझाने के लिए गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पुलिस अधीक्षक (SP) श्री अभिनव विश्वकर्मा, वन मण्डलाधिकारी (DFO) श्री गर्वित गंगवार और सहायक कलेक्टर श्लोक वाइकर मुख्य रूप से मौजूद रहे। कलेक्टर श्री तिवारी ने जिले के तीन बड़े जलाशयों—धरमपुरा, पाली और गिदुरहा की प्रगति की समीक्षा की और कड़े निर्देश जारी किए।
1. धरमपुरा जलाशय: 3 दिनों में कार्रवाई पूरी करने के निर्देश
बैठक में जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री ने बताया कि धरमपुरा जलाशय परियोजना के डूब क्षेत्र की के.एम.एल. (KML) फाइल और अक्षांश-देशांश (Latitude-Longitude) लेकर वन विभाग द्वारा रकबे (Area) का वेरिफिकेशन कर लिया गया है। वर्तमान में स्टेज-1 की फॉरेस्ट क्लीयरेंस की प्रक्रिया चल रही है।
Katni Voter List Revision: कटनी में फोटोयुक्त मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य तेज, दावा-आपत्ति के बीच आज प्रेक्षक करेंगे केंद्रों का औचक निरीक्षण
-
कलेक्टर का निर्देश: कलेक्टर ने डीएफओ श्री गंगवार को अगले 3 दिनों के भीतर ‘ई.डी.एस. भाग-2’ (EDS Part-2) की कार्रवाई पूरी करने और जल संसाधन विभाग को के.एम.एल. फाइल में तुरंत सुधार करने के आदेश दिए हैं।
2. पाली जलाशय: शनिवार को होगा 20 हेक्टेयर भूमि का सीमांकन
पाली जलाशय परियोजना के निर्माण के लिए वन भूमि के बदले ग्राम कुदरा (तहसील ढीमरखेड़ा) में 20.17 हेक्टेयर राजस्व भूमि वन विभाग को दी गई है।
-
कलेक्टर का निर्देश: कलेक्टर ने तहसीलदार ढीमरखेड़ा को निर्देश दिए कि आगामी शनिवार को ही राजस्व, वन और जल संसाधन विभाग की संयुक्त टीम मौके पर भेजकर इस भूमि का सीमांकन (Demarcation) कराएं। साथ ही, जल संसाधन विभाग को ‘परिवेश पोर्टल’ पर वन भूमि व्यपवर्तन (Diversion) के लिए तुरंत ऑनलाइन आवेदन करने को कहा गया।
3. गिदुरहा जलाशय: राजस्व और वन विभाग के विवाद की जांच अब ‘स्टेट कमेटी’ करेगी
गिदुरहा जलाशय के डूब क्षेत्र की जमीन को लेकर कटनी में वन विभाग और राजस्व विभाग के बीच बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वन विभाग ने अनुविभागीय अधिकारी (SDM) बहोरीबंद के पुराने आदेश को मानने से इनकार कर दिया है।
-
कलेक्टर का बड़ा फैसला: मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कलेक्टर श्री तिवारी ने इस विवाद की जांच राज्य स्तरीय समिति (State Level Committee) से कराने का निर्णय लिया है, जिसके लिए राज्य शासन को पत्र भेजा जा रहा है।
-
हालांकि, यहाँ कट-ऑफ की खुदाई और नहर निर्माण का काम जारी है, लेकिन वन सीमा विवाद का अंतिम निराकरण होना अभी बाकी है। डीएफओ को इस मामले में धारा 19 की कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
वन अधिकार दावे: ग्राम सभाओं से अनुमोदन कराने के आदेश
बैठक में वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत सामुदायिक वनों के संसाधन, संरक्षण एवं प्रबंधन के अधिकार (CFRR) की भी समीक्षा की गई।
-
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि वन सीमा से लगे सभी गांवों में सी.एफ.आर.आर. दावे ‘ग्राम वन अधिकार समिति’ को सौंपे जाएं।
-
वन ग्रामों में ग्राम स्तरीय वन अधिकार समिति (FRC) के माध्यम से दावे तैयार किए जाएं और इन्हें अनिवार्य रूप से ग्राम सभा से अनुमोदित (Approve) कराकर उपखण्ड स्तरीय समिति के सामने पेश किया जाए, ताकि वनवासियों को उनके कानूनी अधिकार मिल सकें।
बैठक में ये अधिकारी भी रहे मौजूद: इस उच्च स्तरीय बैठक में डिप्टी कलेक्टर विंकी सिंहमारे उइके, प्रदीप मिश्रा, खनिज उप संचालक रत्नेश दीक्षित, जिला संयोजक (आदिम जाति कल्याण) विमल चौरसिया, पशुपालन उप संचालक डॉ. आर.के. सोनी, उप वनमण्डल अधिकारी सुरेश भरौले और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी सुधांशु तिवारी सहित अन्य विभागों के जिला प्रमुख उपस्थित थे।

