Karnataka Rajya Sabha Chunav: कर्नाटक में कांग्रेस का ‘धमाका’- मल्लिकार्जुन खरगे और पवन खेड़ा समेत तीनों उम्मीदवार निर्विरोध जीते; BJP के खाते में आई 1 सीट
Karnataka Rajya Sabha Chunav: कर्नाटक में कांग्रेस का 'धमाका'- मल्लिकार्जुन खरगे और पवन खेड़ा समेत तीनों उम्मीदवार निर्विरोध जीते; BJP के खाते में आई 1 सीट
Karnataka Rajya Sabha Chunav: कर्नाटक में कांग्रेस का ‘धमाका’- मल्लिकार्जुन खरगे और पवन खेड़ा समेत तीनों उम्मीदवार निर्विरोध जीते; BJP के खाते में आई 1 सीट
बेंगलुरु: बिहार और मध्य प्रदेश के सियासी घमासान के बीच दक्षिण भारत के दुर्ग कर्नाटक से कांग्रेस खेमे के लिए बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। कर्नाटक में राज्यसभा की 4 सीटों पर होने वाले चुनाव की तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है, जहाँ बिना मतदान के ही सभी 4 उम्मीदवारों को निर्विरोध (Unopposed) निर्वाचित घोषित कर दिया गया है।
इस चुनाव में सूबे की सत्ता पर काबिज कांग्रेस ने अपनी मजबूत पकड़ का लोहा मनवाते हुए 3 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है, जबकि मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा (BJP) के खाते में 1 सीट आई है। कांग्रेस की तरफ से खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और फायरब्रांड प्रवक्ता पवन खेड़ा अब राज्यसभा के ‘माननीय’ बन गए हैं।
1. बिना वोटिंग के कैसे तय हुआ जीत का फैसला?
कर्नाटक में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया और नाम वापसी की समय सीमा पूरी होने के बाद निर्वाचन अधिकारी ने नतीजों का आधिकारिक ऐलान किया:
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जितने पद, उतने ही उम्मीदवार: कर्नाटक में राज्यसभा की कुल 4 सीटें खाली थीं और मैदान में भी केवल 4 ही उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया था। किसी भी दल ने अतिरिक्त प्रत्याशी उतारकर ‘क्रॉस वोटिंग’ या मुकाबले की स्थिति पैदा नहीं की। Karnataka Rajya Sabha Chunav: कर्नाटक में कांग्रेस का ‘धमाका’- मल्लिकार्जुन खरगे और पवन खेड़ा समेत तीनों उम्मीदवार निर्विरोध जीते; BJP के खाते में आई 1 सीट
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नहीं पड़ी वोटिंग की जरूरत: सीटों के बराबर उम्मीदवार होने के कारण वोटिंग (मतदान) कराने की नौबत ही नहीं आई और सभी चारों दिग्गज नेताओं को निर्विरोध चुन लिया गया।
2. नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसदों की पूरी लिस्ट और उनके मायने:
| नवनिर्वाचित सांसद का नाम | राजनीतिक दल | राजनीतिक मायने और इनसाइड स्टोरी |
| मल्लिकार्जुन खरगे | कांग्रेस (Congress) | कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का उच्च सदन में पहुंचना नेशनल पॉलिटिक्स में पार्टी की धार और मजबूत करेगा। |
| पवन खेड़ा | कांग्रेस (Congress) | पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और आलाकमान के बेहद करीबी रणनीतिकार को इस जीत से बड़ा सियासी इनाम मिला है। |
| मंसूर अली खान | कांग्रेस (Congress) | इनका चयन कर कांग्रेस ने कर्नाटक में अपने सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन (Social Engineering) को साधने की कोशिश की है। |
| एम. नागराज | भारतीय जनता पार्टी (BJP) | विधानसभा में विधायकों की संख्या के बल पर बीजेपी ने अपनी एकमात्र सीट पर सुरक्षित और कामयाब जीत दर्ज की। |
3. नतीजों ने साफ की कर्नाटक की सियासी हकीकत
इस निर्विरोध चुनाव परिणाम ने कर्नाटक की मौजूदा राजनीतिक हकीकत पर भी मुहर लगा दी है। राज्य में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार मजबूत स्थिति में है, जिसकी गूंज अब देश के उच्च सदन (Rajya Sabha) में भी सुनाई देगी। किसी भी दल द्वारा जोड़-तोड़ या अतिरिक्त उम्मीदवार न उतारना यह दिखाता है कि सभी पार्टियों ने अपने संख्या बल के हिसाब से अपनी सीमाएं तय कर ली थीं। जल्द ही इन चारों नवनिर्वाचित सांसदों का कार्यकाल शुरू होने जा रहा है।








