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Kali Puja: मां काली के पंडालों में दिखने वाली भयानक आकृतियां कौन हैं? जानें डाकनी-शाकनी और योगिनी का पौराणिक रहस्य

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News Summary / Key Takeaways:

रांची / कोलकाता: दीपावली और काली पूजा के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों—विशेषकर पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा और बिहार के पंडालों में श्रद्धालु मां काली के भव्य दर्शन के लिए उमड़ते हैं। हालांकि, पंडाल में प्रवेश करते ही मां काली की दिव्य और विकराल मूर्ति के ठीक नीचे या दोनों ओर खड़ी कुछ आकृतियां अनायास ही लोगों का ध्यान खींच लेती हैं।

लंबे-डरावने दांत, बिखरे हुए बाल, हाथ में खप्पर और बड़ी-बड़ी डरावनी आंखों वाली इन आकृतियों को देखकर पहली नजर में कोई भी इन्हें भूत-पिशाच या असुर समझ बैठता है। झारखंड और बिहार के ग्रामीण इलाकों में इन्हें ‘आकनी और डाकनी’ तथा बंगाल में ‘डाकिनी और योगिनी’ (Dakini and Yogini) के नाम से जाना जाता है।

सवाल यह उठता है कि जगतजननी मां काली के पवित्र पूजा पंडाल में इन भयानक चेहरों को जगह क्यों दी जाती है? क्या ये बुरी शक्तियों का प्रतीक हैं या इनके पीछे कोई गहरा धार्मिक और तांत्रिक रहस्य छिपा है? आइए जानते हैं इसके पीछे का शास्त्रीय एवं तांत्रिक सच।

  1. क्या ये कोई राक्षसियां हैं? (Fact Check)

उत्तर: बिल्कुल नहीं।

शाक्त संप्रदाय और तंत्र ग्रंथों के अनुसार, डाकिनी और योगिनी कोई दानवी या बुरी आत्माएं नहीं हैं, बल्कि ये मां आदिशक्ति की परम भक्त, सहचरी (परिचारिका) और उनके उग्र रूप का हिस्सा हैं। तंत्र शास्त्र में इन्हें शक्ति पीठों और तांत्रिक साधना की रक्षक शक्तियां माना गया है।

  1. पौराणिक कथा: क्यों जन्मीं डाकिनी और योगिनी?

मार्कंडेय पुराण के अंतर्गत ‘श्री दुर्गा सप्तशती’ और ‘काली पुराण’ में इनके प्रकटीकरण का स्पष्ट वर्णन मिलता है:

इसी रणभूमि वाले विकराल और युद्धप्रिय स्वरूप को दर्शाने के लिए पंडालों में मां काली के साथ उनकी इन गण-शक्तियों (डाकिनी-योगिनी) को स्थापित किया जाता है।

  1. दार्शनिक रहस्य: त्रिगुण (Sattva, Rajas, Tamas) का प्रतीक

भारतीय दर्शन में संपूर्ण ब्रह्मांड तीन गुणों—सत्त्व, रजस और तमस से मिलकर बना है। तंत्र और शाक्त मान्यता के अनुसार डाकिनी-योगिनी का रूप इसी दर्शन को उजागर करता है:

| आकृति / देवी | प्रतीक गुण | आध्यात्मिक अर्थ |

|—|—|—|

| डाकिनी (Dakini) | तमोगुण (Tamas) | अज्ञान, अंधकार और मनुष्य के भीतर की आंतरिक बुराइयों (काम, क्रोध, मोह, लोभ) का क्षय करना। |

| योगिनी (Yogini) | रजोगुण (Rajas) | कर्म, ऊर्जा, गतिशीलता और साधक को साधना के मार्ग पर अग्रसर करना। |

| मां काली (Maa Kali) | सत्त्वगुण (Sattva) | परम ज्ञान, मोक्ष, संतुलन और ब्रह्मांडीय शक्ति का सर्वोच्च रूप। |

  1. तंत्र शास्त्र और चौंसठ योगिनी परंपरा

भारतीय इतिहास में योगिनियों का विशेष स्थान रहा है। भारत के प्रमुख चौंसठ योगिनी मंदिर (जैसे खजुराहो, मुरैना और ओडिशा का हीरापुर मंदिर) इस बात का प्रमाण हैं कि प्राचीन काल में योगिनी पूजन एक उच्च तांत्रिक विद्या मानी जाती थी।

  1. क्यों की जाती है मां काली के साथ इनकी पूजा?

शास्त्रों में विधान है कि जब भी किसी महाविद्या या उग्र देवी की पूजा होती है, तो उनके भैरव, क्षेत्रपाल और सहचरों की पूजा अनिवार्य होती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

काली पूजा पंडालों में नजर आने वाली ये आकृतियां डरावनी जरूर दिखाई देती हैं, लेकिन धार्मिक दृष्टिकोण से ये रक्षक और जागृत शक्तियां हैं। ये हमें यह संदेश देती हैं कि ईश्वर केवल शांत और सौम्य रूप में ही नहीं, बल्कि संसार से पाप और अधर्म के विनाश के लिए अत्यंत उग्र रूप में भी प्रकट हो सकते हैं। इसलिए अगली बार जब आप पंडाल में इन मूर्तियों को देखें, तो इनसे भयभीत होने के बजाय मां काली की इन निष्ठावान शक्तियों को नमन करें।

Frequently Asked Questions

Q1. डाकिनी और शाकनी/योगिनी कौन हैं?

उत्तर: डाकिनी और योगिनी मां काली की सहचरी (सेविकाएं) और शक्ति का ही एक उग्र रूप हैं, जिन्होंने युद्धभूमि में असुरों के संहार में मां काली की सहायता की थी।

Q2. झारखंड और बिहार में इन्हें क्या कहा जाता है?

उत्तर: झारखंड और बिहार के स्थानीय क्षेत्रों में इन्हें ‘आकनी और डाकनी’ कहा जाता है।

Q3. क्या डाकिनी और योगिनी बुरी आत्माएं हैं?

उत्तर: नहीं, तंत्र ग्रंथों और हिंदू मान्यताओं के अनुसार ये बुरी आत्माएं नहीं, बल्कि सकारात्मक तांत्रिक शक्तियां और मां काली की रक्षक गण हैं।

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