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K Annamalai Inside Story: कभी थे ‘पोस्टर बॉय’, आज बगावत के मूड में- BJP से क्यों नाराज हैं के. अन्नामलाई? ये हैं मोहभंग की 5 सबसे बड़ी इनसाइड स्टोरी

K Annamalai Inside Story: कभी थे 'पोस्टर बॉय', आज बगावत के मूड में- BJP से क्यों नाराज हैं के. अन्नामलाई? ये हैं मोहभंग की 5 सबसे बड़ी इनसाइड स्टोरी

चेन्नई/दिल्ली: तमिलनाडु भाजपा के सबसे कद्दावर और चर्चित चेहरा रहे पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई इन दिनों अपनी ही पार्टी से बेहद खफा चल रहे हैं। नाराजगी इस कदर बढ़ चुकी है कि वे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और गृह मंत्री अमित शाह से विधिक मुलाकात कर इस्तीफा सौंपने दिल्ली पहुंच चुके हैं।

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तमिलनाडु की सड़कों पर उनके समर्थकों द्वारा लगाए जा रहे पोस्टर्स और 4 जून को उनके जन्मदिन पर नई पार्टी के ऐलान की चर्चाओं के बीच, आइए जानते हैं कि आखिर क्यों और कैसे अन्नामलाई का भाजपा से पूरी तरह मोहभंग हो गया:

 1. AIADMK के साथ जबरन गठबंधन की विवशता

अन्नामलाई का साफ मानना था कि तमिलनाडु में पैर जमाने के लिए भाजपा को दोनों द्रविड़ दलों (DMK और AIADMK) से समान दूरी बनाकर अपनी स्वतंत्र विधिक पहचान रखनी चाहिए।K Annamalai Inside Story: कभी थे ‘पोस्टर बॉय’, आज बगावत के मूड में- BJP से क्यों नाराज हैं के. अन्नामलाई? ये हैं मोहभंग की 5 सबसे बड़ी इनसाइड स्टोरी

  • बलिदान का तर्क: 2024 के लोकसभा चुनाव में अन्नामलाई की जिद पर भाजपा ने अकेले चुनाव लड़ा और पार्टी का वोट शेयर बढ़कर 11.24% पहुंच गया, भले ही कोयंबटूर से खुद अन्नामलाई सहित पार्टी कोई सीट नहीं जीत सकी।

  • केंद्रीय नेतृत्व का दबाव: इसके बावजूद, दिल्ली में बैठे आलाकमान का मानना था कि बिना एआईएडीएमके (AIADMK) के साथ आए तमिलनाडु में द्रमुक को हराना असंभव है, जो अन्नामलाई को कतई मंजूर नहीं था।

 2. प्रदेश अध्यक्ष पद से अचानक और अपमानजनक विदाई

अन्नामलाई ने साल 2021 से 2025 तक अपनी ऐतिहासिक ‘एन मन, एन मक्कल’ (मेरी भूमि, मेरे लोग) पदयात्रा के जरिए राज्य के कोने-कोने में भाजपा को खड़ा किया था। लेकिन अप्रैल 2025 में पार्टी ने अचानक उन्हें हटाकर नैनार नागेंद्रन को अध्यक्ष बना दिया।

  • विपक्षी दल की शर्त: इनसाइड रिपोर्ट्स के मुताबिक, AIADMK के महासचिव एडप्पाडी के पलानीस्वामी (EPS) ने भाजपा के सामने गठबंधन की पहली और मुख्य शर्त यही रखी थी कि अन्नामलाई को अध्यक्ष पद से हटाया जाए। पलानीस्वामी, अन्नामलाई द्वारा पूर्व में की गई तीखी आलोचनाओं से नाराज थे और भाजपा आलाकमान ने गठबंधन के लिए अन्नामलाई की विधिक बलि दे दी।

3. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में घोर अनदेखी

हाल ही में संपन्न हुए 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के दौरान अन्नामलाई की नाराजगी खुलकर सतह पर आ गई।

  • फैसलों से किया दरकिनार: चुनावी रणनीति बनाने, टिकटों के विधिक बंटवारे और प्रचार की रूपरेखा तय करने जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं से केंद्रीय नेतृत्व ने अन्नामलाई को पूरी तरह ‘किनारे’ (Sideline) कर दिया।

  • चुनाव लड़ने से इनकार: इस घोर अनदेखी और सांगठनिक अपमान से आहत होकर अन्नामलाई ने खुद 2026 का विधानसभा चुनाव लड़ने से साफ विधिक इनकार कर दिया था।

4. हिंदी और भाषा नीति जैसे नीतिगत मतभेद

अन्नामलाई खुद को हमेशा ‘तमिल गौरव’ के प्रतीक के रूप में पेश करते रहे हैं। जब केंद्र सरकार ने स्कूलों में तीन-भाषा नीति (Three-Language Policy) को लागू करने की विधिक अधिसूचना जारी की, तो अन्नामलाई ने इसके टाइमिंग पर खुलेआम सवाल उठाए।

  • क्षेत्रीय भावनाएं सर्वोपरि: उन्होंने तमिलनाडु की जनता के गुस्से को भांपते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को पत्र लिखकर इस विधिक अधिसूचना को तत्काल रद्द करने का आग्रह किया था, जिसे दिल्ली में बैठे कुछ बड़े नेताओं ने अनुशासनहीनता माना था।

 5. उम्मीदवार चयन और चुनावी रणनीति पर टकराव

सीटों के विधिक बंटवारे, उम्मीदवारों के चयन और चुनावी फंड्स के मैनेजमेंट को लेकर अन्नामलाई और भाजपा के राष्ट्रीय विधिक विंग के बीच लगातार टकराव की स्थिति बनी रही। दिल्ली का आलाकमान पारंपरिक और पुराने चेहरों पर दांव लगाना चाहता था, जबकि अन्नामलाई युवाओं और नए विधिक विकल्पों को आगे लाने के पक्षधर थे। इसी वैचारिक मतभेद ने आखिरकार इस बड़े रिश्ते को टूटने के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया।

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