ट्रंप के 200% जेनेरिक दवा टैरिफ का भारतीय फार्मा पर क्या होगा असर? GTRI रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
ट्रंप के 200% जेनेरिक दवा टैरिफ का भारतीय फार्मा पर क्या होगा असर? GTRI रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
ट्रंप के 200% जेनेरिक दवा टैरिफ का भारतीय फार्मा पर क्या होगा असर? GTRI रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
नई दिल्ली/वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आयातित जेनेरिक दवाओं (Generic Medicines) पर 200 फीसदी तक का भारी-भरकम सीमा शुल्क (Tariff) लगाने के ऐलान से दुनिया भर के फार्मास्युटिकल बाजार में हलचल मच गई है। हालांकि, थिंक-टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की एक नई रिपोर्ट “India’s Generic Drug Exports Face New U.S. Tariff Threat” के अनुसार, इस झटके के बाद भी भारतीय जेनेरिक दवाएं अपनी कम लागत और बेहतरीन क्वालिटी के दम पर अमेरिकी बाजार में अपना दबदबा कायम रखेंगी।
कैसे लागू होगा नया टैरिफ स्ट्रक्चर?
अमेरिकी प्रशासन की योजना के अनुसार घरेलू उत्पादन (Re-shoring) को बढ़ावा देने के लिए एक टाइमलाइन तय की गई है:
-
1 अगस्त 2028 तक: जेनेरिक दवाओं पर 0% ड्यूटी रहेगी ताकि कंपनियां प्रोडक्शन शिफ्ट कर सकें।
-
अगस्त 2028 से: आयातित दवाओं पर 100% टैरिफ लागू होगा।
-
अगस्त 2029 से: जिन मेकर्स ने US में यूनिट्स नहीं लगाईं, उन पर 200% का भारी टैरिफ लगेगा।
भारत के लिए चुनौती क्यों, लेकिन कैसे मिलेगी बढ़त?
-
बड़ा मार्केट शेयर: साल 2025 में भारत ने दुनिया भर में $25.8 अरब की दवाएं एक्सपोर्ट कीं, जिसमें से अकेले $9.7 अरब (37.7%) की सप्लाई अमेरिका को की गई। US की लगभग 47% जेनेरिक दवाएं भारतीय कंपनियां ही मुहैया कराती हैं।
-
7 से 10 गुना सस्ती दवाएं: GTRI के अनुसार कई भारतीय जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 7 से 10 गुना तक सस्ती हैं। ऐसे में 200% टैरिफ लगने के बावजूद वे अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी बनी रहेंगी और इसका अतिरिक्त वित्तीय बोझ अंततः अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम, बीमा कंपनियों व मरीजों पर पड़ेगा।
-
US में पहले से मौजूद भारतीय इकाइयाँ: सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज, सिप्ला, जाइडस, ल्यूपिन और ऑरोबिंदो जैसी दिग्गज भारतीय कंपनियों की पहले से ही अमेरिका में FDA-मंजूर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स चालू हैं।
चीन पर निर्भरता है सबसे बड़ा रणनीतिक जोखिम
GTRI के फाउंडर अजय श्रीवास्तव ने आगाह किया है कि भारत को अपनी सप्लाई चेन की कमजोरियों पर तुरंत काम करना होगा।
-
भारतीय दवा कंपनियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल-बेस्ड APIs का लगभग 70% और बायोलॉजिक इनपुट का 90% हिस्सा चीन से आता है।
-
रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि भारत को घरेलू API क्षमता को फिर से मजबूत करना चाहिए और अमेरिका के अलावा यूरोप, अफ्रीका व लैटिन अमेरिका के बाजारों में भी निर्यात तेजी से बढ़ाना चाहिए।








