के. अन्नामलाई नई राजनीतिक पार्टी का एलान कर बोले- ‘तमिलनाडु में लड़ेंगे अगला विधानसभा चुनाव
के. अन्नामलाई नई राजनीतिक पार्टी का एलान कर बोले- 'तमिलनाडु में लड़ेंगे अगला विधानसभा चुनाव
चेन्नई: दक्षिण भारत और विशेषकर तमिलनाडु की राजनीति में शुक्रवार (05 जून) को एक बहुत बड़ा और कड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कद्दावर नेता और तमिलनाडु इकाई के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने भाजपा से विधिक रूप से अलग होने के बाद एक नए राजनीतिक दल और बड़े ‘पॉलिटिकल मूवमेंट’ (Political Movement) के गठन का आधिकारिक एलान कर दिया है।
एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पूर्व आईपीएस अधिकारी (IPS Officer) अन्नामलाई ने अपने भविष्य के कड़े प्लान को देश के सामने रखा और स्पष्ट किया कि उनकी नई पार्टी तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनाव पूरी ताकत के साथ लड़ेगी.
‘आज से नए सफर की शुरुआत’: परिवारवाद पर अंकुश लगाने के लिए लाएंगे टर्म लिमिट
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अन्नामलाई ने अपने राजनीतिक सिद्धांतों और भविष्य के विन्यास को लेकर कई कड़े और महत्वपूर्ण बिंदु सामने रखे:
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साफ-सुथरी राजनीति का विन्यास: अन्नामलाई ने कहा, “मैंने बीजेपी से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया है। आज से मेरे जीवन के एक नए सफर और राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत हो रही है। मैं राज्य में बिल्कुल साफ-सुथरी पॉलिटिक्स (Clean Politics) की शुरुआत करना चाहता हूं।”
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परिवारवाद पर कड़ा प्रहार: उन्होंने घोषणा की कि जब उनका नया दल पूरी तरह अस्तित्व में आ जाएगा, तो वे पार्टी के पदों और नेतृत्व के लिए एक ‘टर्म लिमिट’ (कार्यकाल की समय-सीमा) लेकर आएंगे, ताकि पारंपरिक राजनीति में पैर पसार चुके परिवारवाद पर विधिक रूप से कड़ा अंकुश लगाया जा सके।
रजनीकांत ने दिया था अपनी पार्टी का ऑफर; बीएल संतोष को वादे के कारण किया था मना
अन्नामलाई ने अपने अब तक के राजनीतिक सफर का विन्यास साझा करते हुए एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा किया:
रजनीकांत का वो फोन कॉल: अन्नामलाई ने बताया कि वर्ष 2009 में उन्होंने DMDK में एक इंटर्नशिप के जरिए राजनीतिक जमीन को समझा था। इसके बाद जब वे 24 अगस्त 2020 को बीजेपी में शामिल होने जा रहे थे, तब दक्षिण के महानायक रजनीकांत ने उन्हें फोन कर अपनी राजनीतिक पार्टी में शामिल होने का बड़ा ऑफर दिया था। लेकिन वे उससे पहले ही भाजपा के कड़े संगठनात्मक नेता बी.एल. संतोष को भाजपा में आने का जुबान (वादा) दे चुके थे, इसलिए उन्होंने आदरपूर्वक रजनीकांत को मना कर दिया और बीजेपी का दामन थाम लिया था।
पीएम मोदी के प्रति आदर, लेकिन 3-लैंग्वेज पॉलिसी का कड़ा विरोध
नीतियों के विन्यास पर बात करते हुए पूर्व आईपीएस (‘सिंघम’) ने साफ किया कि पार्टी के विस्तृत सिद्धांतों और नीतियों का औपचारिक एलान वे आने वाले दिनों में करेंगे। उन्होंने कहा:
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मतभेदों पर कड़ा रुख: “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति मेरे मन में हमेशा सर्वोच्च आदर रहेगा। लेकिन तमिलनाडु के हितों को लेकर यदि बीजेपी से हमारा किसी भी नीतिगत मुद्दे पर मतभेद है, तो उसे पूरी गंभीरता और कड़ाई के साथ जनता के बीच उठाया जाएगा।”
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भाषा नीति पर टकराव: अन्नामलाई ने खुलासा किया कि केंद्र सरकार की ‘थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी’ (3-Language Policy) का उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद पर रहते हुए भी कड़ा विधिक विरोध किया था। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में मिलकर स्पष्ट कह दिया था कि वे तमिलनाडु में बैठकर केवल पत्र के जरिए इस्तीफा भेजने वाले कमजोर नेता नहीं हैं, बल्कि सीधे मिलकर अपनी बात रखने और कमियों को उजागर करने का कड़ा माद्दा रखते हैं।
भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने मंजूर किया इस्तीफा; 6 साल पुराना रिश्ता खत्म
बीजेपी आलाकमान की ओर से इस पूरे विन्यास पर शुक्रवार को आधिकारिक मुहर लगा दी गई:
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इस्तीफा हुआ स्वीकार: बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने शुक्रवार को अन्नामलाई का इस्तीफा विधिक रूप से मंजूर कर लिया, जिसके साथ ही छह साल पुराना यह कड़ा राजनैतिक सफर समाप्त हो गया।
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फैसले पर पुनर्विचार की थी अपील: इससे पहले दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह और अध्यक्ष नितिन नबीन के साथ हुई मैराथन बैठकों में भाजपा ने अन्नामलाई से अपने इस कड़े फैसले पर फिर से विचार (Review) करने का अनुरोध किया था, लेकिन वे तमिलनाडु के स्थानीय विन्यास को लेकर अपने रुख पर पूरी तरह अडिग रहे।








