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जेके सीमेंट प्लांट हादसा: कई गंभीर मजदूर कटनी लाए गए, जिला अस्पताल व निजी अस्पताल में कराया गया भर्ती

JK cement plant accident in panna
पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना में जेके सीमेंट प्लांट में हुए हादसे ने सभी को हैरान कर दिया है। इस हादसे में कई मजदूरों के जान गवाने की खबर भी सामने आई है। सोशल मीडिया पर मौत के आकड़े एक दर्जन से ज्यादा बताए जा रहे है। इन अफवाहों पर लगाम लगाते हुए एसडीओपी ने घायलों और मृतकों की जानकारी दी है। गौरतलब है कि सिमरिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पवई इलाके के ग्राम पगरा स्थित जेके सीमेंट की फैक्ट्री में निर्माणाधीन छत की स्लैब गिर गई। इस हादसे में कई मजदूरों के जान गवाने की खबर भी सामने आई है। सोशल मीडिया पर मौत के आकड़े एक दर्जन से ज्यादा बताए जा रहे है। ऐसी जानकारियों से फैक्टी में काम करने वाले मजदूरों के परिजन परेशान हो रहे है। इन अफवाहों पर लगाम लगाते हुए एसडीओपी सौरभ रत्नाकर ने घायलों और मृतकों की जानकारी दी है। एसडीओपी सौरभ रत्नाकर ने जानकारी देते हुए बताया किए जेके सीमेंट फैक्ट्री में हुए हादसे में तीन मजदूरों की मौत हुई है। एक दर्जन से ज्यादा मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कई गंभीर रूप से घायल मजदूरों को कटनी जिला अस्पताल व निजी अस्पतालों में भी भर्ती कराया गया है। उल्लेखनीय है कि पन्ना में हुए भीषण हादसे ने सभी जगह सनसनी फैला दी है। सोशल मीडिया पर भी ये घटना खूब वायरल हो रही है। कई यूजर्स पोस्ट के जरिए घटना की जानकारी शेयर कर रहे हैं। जिसमे 50 से अधिक लोगों के हताहत और एक दर्जन से ज्यादा मजदूरों की मौत की बात बताई गई है। इससे प्लांट में कार्यरत मजदूरों के परिजन काफी परेशान हो रहे हैं।
सेटरिंग टूटने से हुआ हादसा
प्रत्यक्ष सदस्यों के मुताबिक सिमरिया थाना अंतर्गत मुरैना और पगारा के बीच हरिद्वार केन में जेके सीमेंट का दूसरा प्लांट बनाया जा रहा है। प्लांट की लाइन टू का काम रोजाना की तरह गुरुवार को भी चल रहा था। तभी दूसरे और तीसरे माले की शटरिंग एकाएक नीचे गिर गई। नीचे कई मजदूर काम कर रहे थे जो कि शटरिंग की चपेट में आ गए। मामले की जानकारी लगते ही पुलिस की टीम घटनास्थल पर पहुंची।
छोटे कर्मचारियों को किया बाहर
जेके सीमेंट प्लांट प्रबंधन ने हादसे के बाद आवाजही पर प्रतिबंध लगा दिया। सभी गेटों पर सुरक्षा कर्मी तैनात कर दिए गए। जब सोशल मीडिया पर हादसे की खबरें वायरल होने लगी तो मजदूर और छोटे कर्मचारियों को प्लांट से बाहर कर दिया गया।
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