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जनअभियान परिषद ने किया आदि शंकराचार्य जयंती का  आयोजन ,अद्वैत वेदांत के प्रवर्तक और चार सिद्ध पीठों के संस्थापक के रूप में शंकराचार्य का योगदान वंदनीय:- आचार्य प्रशांत 

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जनअभियान परिषद ने किया आदि शंकराचार्य जयंती का  आयोजन ,अद्वैत वेदांत के प्रवर्तक और चार सिद्ध पीठों के संस्थापक के रूप में शंकराचार्य का योगदान वंदनीय:- आचार्य प्रशांत

*रीठी। मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद विकासखंड रीठी अध्ययन केंद्र के द्वारा चलाये जा रहे पाठ्यक्रम समाजकार्य में स्नातक व स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के छात्र/छात्राओ द्वारा विकासखंड स्तरीय आदि शंकराचार्य जी की जयंती के अवसर पर व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया। सर्वप्रथम आदि शंकराचार्य जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलित कर मंत्रोच्चारण के साथ शुरुआत की गई। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आचार्य श्री प्रशांत जी महाराज श्रीधाम वृंदावन का आगमन हुआ। विकासखंड समन्वयक श्री अरविंद शाह द्वारा शॉल व श्रीफल से स्वागत किया गया। आचार्य श्री प्रशांतजी ने अपने व्यख्यान में बताया कि आदि शंकराचार्य जयंती वैशाख शुक्ल पंचमी को मनाई जाती है, जो हिंदू कैलेंडर के अनुसार एक महत्वपूर्ण तिथि है। इस दिन को आदि शंकराचार्य के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है, जिन्हें अद्वैत वेदांत के संस्थापक और एक महान दार्शनिक के रूप में सम्मानित किया जाता है, आदि शंकराचार्य का जन्म 507 ईसा पूर्व के आसपास हुआ था, और उनकी शिक्षाएं हिंदू धर्म और दर्शन पर गहरा प्रभाव डालती हैं। उन्होंने भारत के चार कोनों में चार मठों की स्थापना की, जो आज भी प्रसिद्ध और पवित्र माने जाते हैं जिसमें से ज्योतिर्पीठ बदरिकाश्रम, श्रृंगेरी पीठ, द्वारिका शारदा पीठ, पुरी गोवर्धन पीठ हैं। आदि शंकराचार्य की जयंती पर, लोग उनके जीवन और शिक्षाओं को याद करते हैं और उनके द्वारा स्थापित मठों में विशेष पूजा और अनुष्ठान करते हैं। यह दिन हिंदू समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो आदि शंकराचार्य की विरासत और उनके योगदान को सम्मानित करने के लिए एक साथ आते हैं। वहीं अतिथि के रूप में श्री रामसुजान द्विवेदी जी प्रबंधक NRLM कटनी उपस्थित हुए जिन्होंने बताया कि शंकर दिग्विजय, शंकरविजयविलास, शंकरजय आदि ग्रन्थों में उनके जीवन से सम्बन्धित तथ्य उद्घाटित होते हैं। दक्षिण भारत के केरल राज्य (तत्कालीन मालाबारप्रांत) में आद्य शंकराचार्य जी का जन्म हुआ था। उनके पिता शिव गुरु तैत्तिरीय शाखा के यजुर्वेदी भट्ट ब्राह्मण थे। भारतीय प्राच्य परम्परा में आद्यशंकराचार्य को शिव का अवतार स्वीकार किया जाता है। कुछ उनके जीवन के चमत्कारिक तथ्य सामने आते हैं, जिससे प्रतीत होता है कि वास्तव में आद्य शंकराचार्य शिव के अवतार थे। आठ वर्ष की अवस्था में श्री गोविन्द नाथ के शिष्यत्व को ग्रहण कर संन्यासी हो जाना, पुन: वाराणसी से होते हुए बद्रिकाश्रम तक की पैदल यात्रा करना, सोलह वर्ष की अवस्था में बद्रीकाश्रम पहुंच कर ब्रह्मसूत्र पर भाष्य लिखना, सम्पूर्ण भारत वर्ष में भ्रमण कर अद्वैत वेदान्त का प्रचार करना, दरभंगा में जाकर मण्डन मिश्र से शास्त्रार्थ कर वेदान्त की दीक्षा देना तथा मण्डन मिश्र को संन्यास धारण कराना, भारतवर्ष में प्रचलित तत्कालीन कुरीतियों को दूर कर समभावदर्शी धर्म की स्थापना करना – इत्यादि कार्य इनके महत्त्व को और बढ़ा देता है। दशनाम गोस्वामी समाज (सरस्वती, गिरि, पुरी, बन, भारती, तीर्थ, सागर, अरण्य, पर्वत और आश्रम ) की सस्थापना कर, हिंदू धर्मगुरू के रूप में हिंदुओं के प्रचार प्रसार व रक्षा का कार्य सौपा और उन्हें अपना आध्यात्मिक उत्तराधिकारी भी बताया। इसीक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे सचिव संघ के अध्यक्ष  सुक्खी लाल यादव जो कि यदि शंकराचार्य जी की जयंती पर विचार रखते हुए उनकी जीवनी की महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की साथ ही समाज कल्याण के लिये सभी अपने अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित व दृण संकल्पित होकर कार्य करें तो सफलता निश्चित तौर पर मिलेगी एवं नवांकुर संस्था के अध्यक्ष श्री कोदूलाल जी हल्दकार ढीमरखेड़ा से उपस्थित हुए जिन्होंने जल गंगा संवर्धन अभियान अंर्तगत महत्वपूर्ण विचार रखे वहीं विकासखंड समन्वयक  अरविंद शाह जी द्वारा बताया गया कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा आदि शंकराचार्य जी की जयंती को एक अभियान के रूप में मानकर पूरे सप्ताह भर कार्यक्रम आयोजित करने की कार्ययोजना तैयार की गई है जिसमें संगोष्ठी, चौपाल, जनजागरूकता आदि के माध्यम से आमजन को अवगत कराने का प्रयास किया जा रहा है, साथ ही परामर्शदाता गोवर्धन रजक द्वारा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए जिससे हमारा देश किसी भी विकट स्थिति में सुगमता से सामना कर सके। इस अवसर पर रीठी विकासखंड की सभी नवांकुर संस्था के सदस्यों में से  उमेश त्रिपाठी, सुरेंद्र पाठक, मो. मुस्तकीम खान,  आशा रजक, दिनेश कुमार, एवं ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों के सदस्यों के साथ परामर्शदाता अरुण तिवारी, गोवर्धन रजक, शरद यादव,  भावना सिंह एवं सभी छात्र/छात्राओं की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन  शरद यादव व आभार प्रदर्शन श्री अरुण तिवरी द्वारा किया गया l

 

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