जबलपुर। कोरोना संकटकाल में एक बार फिर रानी दुर्गावती युनिवर्सिटी के कर्मचारियों को श्रमसाध्य देने का विरोध शुरू हो गया है।
विरोध करने वालों में छात्र संगठन भी हैं। आरोप लगाया कि महीने भर पढ़ाने वाले अतिथियों को वेतन देने में जहां प्रशासन आनाकानी कर रहा है, वहीं कर्मियों को घर बैठे ही भत्ता बांटने की तैयारी हो रही है।
करीब 55 लाख रुपये की किश्त भत्ते के तौर पर बांटने की कवायद जारी है। इधर ऑडिट से भी इस भत्ते को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। वहीं एनएसयूआई ने भी मामले पर प्रशासन को कटघरे में रखा है।
घर बैठे कर्मियों को मिल रहा भत्ता :
छात्र नेता सचिन रजक ने बताया कि छात्रों का पैसा युनिवर्सिटी कर्मचारियों में गलत ढंग से बांट रहा है। लॉकडाउन के दौरान जो कर्मी घर पर रहे उन्हें वेतन दिया जा रहा है इसके बावजूद भत्ता देना गलत है।
परीक्षा कार्य के लिए ये भत्ता मिलना चाहिए, लेकिन परीक्षा का संचालन हुआ ही नहीं तो भत्ता देना उचित नहीं है।
छात्रों ने नोट उड़ाकर कुलसचिव कार्यालय में विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने कहा कि एक तरफ छात्रों से फीस बढ़ाकर प्रशासन वसूली कर रहा है वहीं कर्मचारियों को मुफ्त मानदेय बांटा जा रहा है।
भत्ता देने के लिए राज्य शासन से भी किसी तरह की मंजूरी नहीं ली गई है। विरोध करने वाले छात्र नोट की टोकरी लेकर कुलसचिव कार्यालय पहुंचे।
उन्होंने प्रभारी कुलसचिव दीपेश मिश्रा से श्रमसाध्य भत्ता का निर्णय वापस लेने की मांग की है
