Jabalpur High Court on Potholes: “जब समंदर के नीचे मेट्रो बन सकती है, तो गड्ढामुक्त सड़कें क्यों नहीं?” मौत के गड्ढों पर हाई कोर्ट सख्त
Jabalpur High Court on Potholes: "जब समंदर के नीचे मेट्रो बन सकती है, तो गड्ढामुक्त सड़कें क्यों नहीं?" मौत के गड्ढों पर हाई कोर्ट सख्त

Jabalpur High Court on Potholes: “जब समंदर के नीचे मेट्रो बन सकती है, तो गड्ढामुक्त सड़कें क्यों नहीं?” मौत के गड्ढों पर हाई कोर्ट सख्त
जबलपुर: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य में सड़कों की जर्जर हालत और ‘मौत के गड्ढों’ को लेकर सरकार और संबंधित निर्माण एजेंसियों को आड़े हाथों लिया है। हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए सड़क निर्माण की गुणवत्ता और सरकारी जवाबदेही पर बेहद तल्ख टिप्पणी की है।
हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: “देश में जब न्यूक्लियर प्लांट बन सकते हैं…”
सड़कों के खस्ताहाल और जानलेवा गड्ढों पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की युगलपीठ ने तीखा सवाल पूछते हुए कहा:
“जब देश में न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाए जा सकते हैं और समुद्र के नीचे तक मेट्रो चलाई जा सकती है, तो फिर ऐसी सड़कें क्यों नहीं बनाई जा सकतीं जो सालों-साल तक गड्ढामुक्त रहें?”
हाई कोर्ट की इस मौखिक टिप्पणी ने प्रदेश में सड़कों के निर्माण में हो रही धांधली, घटिया सामग्री के इस्तेमाल और प्रशासनिक अनदेखी पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है।
जानलेवा सड़कों को लेकर दायर हुई थी जनहित याचिका
-
‘मौत के गड्ढों’ से लगातार हादसे: जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में सड़कों की खस्ताहाली और बड़े-बड़े गड्ढों के कारण हो रही मौतों व दुर्घटनाओं के खिलाफ हाई कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई थी। Jabalpur High Court on Potholes: “जब समंदर के नीचे मेट्रो बन सकती है, तो गड्ढामुक्त सड़कें क्यों नहीं?” मौत के गड्ढों पर हाई कोर्ट सख्त
-
ठेकेदारों और एजेंसियों की जवाबदेही: अदालत के इस कड़े रुख के बाद अब लोक निर्माण विभाग (PWD), नेशनल हाईवे अथॉरिटी (NHAI) और स्थानीय निकायों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं। कोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि सड़कों के रखरखाव में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।








