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Jabalpur बच्चों के लिए जहर बन गई कटहल की सब्जी, कम पड़ गई एंबुलेंस, अस्पताल में हड़कंप

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Jabalpur एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में पढ़ने वाले सैकड़ों बच्चे अचानक बीमार हो गए। सोमवार रात लगभग आठ बजे मेस में बच्चों ने खाना खाया। खाना खाने के लगभग 10 मिनट बाद एक-एक सभी बच्चों को उल्टी करने लगे। यह घटना रामपुर की है। एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में रात के वक्त बच्चों को खाना खाने के बाद फूड पाइजनिंग हो गई। प्रारंभिक जांच में बच्चे कटहल की सब्जी खाकर बीमार हुए गए। सभी बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया और जांच की गई। अधिकांश को उल्टी-दस्त की शिकायत थी। कइयों की हालात बेहतर है। समय पर सभी काे अस्पताल पहुंचाया गया। अधिकांश बच्चों की जांच कर उन्हें छात्रावास भेजा गया है।

देखते ही देखते छात्रावास के लगभग 100 बच्चे उल्टी करते हुए जमीन पर गिरने लगे। यह देख छात्रावास प्रबंधन में हड़कंप मच गया। उन्होंने तत्काल इनकी जानकारी संंबंधित अधिकारियों के साथ पुलिस और प्रशासन को दी। इधर खबर लगते ही जिला प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और तत्काल एंबुलेंस की मदद से सभी को अस्पताल पहुंचाया गया।

मौके पर स्वास्थ्य और खाद्य विभाग के अधिकारी भी पहुंचे और उन्होंने बच्चों से पूछताछ के बाद मैस में रखे खाने की जांच की। इस दौरान पता चला कि सातवीं-आठवीं के बच्चों को रात लगभग आठ बजे मैस में खाना परोसा गया। खाने के दौरान उन्हें कटहल की सब्जी भी दी गई, जिसे खाने के बाद बच्चे बीमार हुए और फूड पाइजनिंग की शिकार हो गए।

कम पड़ गई एंबुलेंस, अस्पताल में हड़कंप

गोरखपुर एसडीएम पंकज मिश्रा, तहसीलदार रश्मी चौधरी समेत प्रशासनिक विभाग के अधिकारी और पुलिस बल मौके पर पहुंचे। बारी-बारी से सभी बच्चों को एंबुलेंस की मदद से अस्पताल पहुंचाना शुरू किया। इस दौरान छात्रावास में तत्काल मौके पर एंबुलेंस बुलाई गईं, लेकिन फूड पाइजिनिंग से बीमार बच्चों की संख्या देखते ही देखते 50 के ऊपर पहुंच गई।

30 मिनट के भीतर ही 10 एंबुलेंस पहुंची

इतनी संख्या में सभी को अस्पताल पहुंचाने में प्रशासनिक अधिकारियों को पसीने छूट गए। इधर तत्काल शहर के सभी कोनों से शासकीय एंबुलेंस को छात्रावास पहुंचाया गया। लगभग 30 मिनट के भीतर ही 10 एंबुलेंस पहुंची और बच्चों को लेकर अस्पताल रवाना हो गई। कई बच्चों की नाजुक हालात को देखते हुए उन्हें पास के ही निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस दौरान बच्चों को अस्पताल ले जाने एंबुलेंस भी कम पड़ गई।

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