ITR Filing 2026: टैक्स रिफंड बढ़ाने के 5 सीक्रेट्स, इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से पहले जान लें एक्सपर्ट्स के ये फॉर्मूले
ITR Filing 2026: टैक्स रिफंड बढ़ाने के 5 सीक्रेट्स, इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से पहले जान लें एक्सपर्ट्स के ये फॉर्मूले

ITR Filing 2026: टैक्स रिफंड बढ़ाने के 5 सीक्रेट्स, इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से पहले जान लें एक्सपर्ट्स के ये फॉर्मूले
बिजनेस डेस्क इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का सीजन दस्तक दे चुका है। ऐसे में हर टैक्सपेयर की सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि वह अपना टैक्स रिफंड (Tax Refund) कैसे बढ़ाए। दरअसल, जब पूरे वित्तीय वर्ष में आपकी ओर से चुकाया गया एडवांस टैक्स या कटा हुआ टीडीएस (TDS) आपकी वास्तविक टैक्स देनदारी से ज्यादा होता है, तो आयकर विभाग वह अतिरिक्त रकम आपको रिफंड के रूप में लौटा देता है।
टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, थोड़ी सी सूझबूझ और सही प्लानिंग से आप अपना रिफंड अधिकतम कर सकते हैं। आइए जानते हैं वो तरीके जिससे आपका फंसा हुआ पैसा बिना किसी रुकावट के सीधे आपके बैंक खाते में आ जाएगा:
1. सही टैक्स रिजीम (Old vs New) का चुनाव
रिटर्न फाइल करने से पहले सबसे अहम कदम पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था की तुलना करना है। यह कतई जरूरी नहीं कि जो विकल्प आपके सहकर्मी या दोस्त के लिए बेस्ट हो, वही आपके लिए भी हो। दोनों विकल्पों में अपनी टैक्स देनदारी का गणित समझें और जिसमें आपका टैक्स सबसे कम बन रहा हो, उसी का चुनाव करें। सटीक रिजीम चुनकर आप साल भर कटा हुआ अतिरिक्त टीडीएस वापस पा सकते हैं।
2. पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Regime) में डिडक्शन क्लेम करें
अगर आपकी कैलकुलेशन पुरानी टैक्स व्यवस्था की तरफ इशारा कर रही है, तो टैक्स छूट और रिफंड बढ़ाने के कई शानदार मौके हैं:
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सेक्शन 80C: पीपीएफ (PPF), ईपीएफ (EPF), ईएलएसएस (ELSS), लाइफ इंश्योरेंस या 5 साल की टैक्स-सेविंग एफडी में निवेश करके सीधे ₹1.5 लाख तक की छूट लें।
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सेक्शन 80D: हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम चुकाकर उम्र के हिसाब से ₹25,000 से लेकर ₹50,000 तक का अतिरिक्त फायदा पाएं।
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HRA और होम लोन: किराए के मकान में रहने वाले शर्तों के साथ हाउस रेंट अलाउंस (HRA) क्लेम कर सकते हैं। वहीं, सेक्शन 24(b) के तहत होम लोन के ब्याज पर ₹2 लाख तक की बड़ी राहत पा सकते हैं।
3. NPS निवेश से मिलेगी ₹50,000 की ‘एक्स्ट्रा पावर’
यदि आपकी सेक्शन 80C की ₹1.5 लाख की लिमिट पूरी हो चुकी है, तो नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) आपके लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
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सेक्शन 80CCD(1B): इसके तहत एनपीएस में निवेश कर आप ₹50,000 की अतिरिक्त टैक्स कटौती का दावा कर सकते हैं।
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नियोक्ता का योगदान (Employer Contribution): सेक्शन 80CCD(2) के तहत नियोक्ता के योगदान पर मिलने वाला टैक्स लाभ पुरानी और नई, दोनों टैक्स व्यवस्थाओं में उपलब्ध है। पुरानी रिजीम में वेतन के 10% और नई रिजीम में 14% तक के योगदान पर टैक्स छूट क्लेम की जा सकती है। ITR Filing 2026: टैक्स रिफंड बढ़ाने के 5 सीक्रेट्स, इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से पहले जान लें एक्सपर्ट्स के ये फॉर्मूले
4. स्टैंडर्ड डिडक्शन का पूरा लाभ उठाएं
हर वेतनभोगी (Salaried) टैक्सपेयर को बिना कोई निवेश प्रूफ दिए सीधे अपनी टैक्स योग्य आय पर ‘स्टैंडर्ड डिडक्शन’ का फायदा मिलता है:
- पुरानी व्यवस्था में: यह कटौती ₹50,000 है।
- नई व्यवस्था में: इसे बढ़ाकर ₹75,000 कर दिया गया है।
- इसके अलावा फैमिली पेंशन प्राप्तकर्ताओं को सेक्शन 57(iia) के तहत पुरानी रिजीम में ₹15,000 और नई रिजीम में ₹25,000 तक की छूट मिलती है।
5. रिफंड बिना अटके खाते में पाने के लिए 4 जरूरी कदम
टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, छोटी सी गलती भी आपके रिफंड को अटका सकती है या विभाग के नोटिस का कारण बन सकती है। इसलिए इन बातों का खास ध्यान रखें:
- सटीक फॉर्म चुनें: अपनी आय के स्रोत (सैलरी, बिजनेस, कैपिटल गेन आदि) के हिसाब से एकदम सही आईटीआर (ITR) फॉर्म चुनें।
- डेटा का मिलान: रिटर्न में पहले से भरे हुए टीडीएस डिटेल्स का अपने फॉर्म 16 या 16A से मिलान जरूर करें।
- बैंक खाता वैलिडेट करें: बैंक खाते की जानकारी (IFSC कोड और अकाउंट नंबर) बिल्कुल सही भरें क्योंकि रिफंड सीधा आपके एक्टिव (Pre-validated) खाते में ही क्रेडिट किया जाएगा।
- ई-वेरिफिकेशन (e-Verification) है सबसे जरूरी: आईटीआर सबमिट करने के तुरंत बाद अपना ई-वेरिफिकेशन पूरा करें। आयकर विभाग आपके रिटर्न की प्रोसेसिंग ई-वेरिफिकेशन के बाद ही शुरू करता है, इसलिए इसमें देरी मतलब रिफंड में देरी।








