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टाइप-2 डायबिटीज का कारण बन सकता है ‘इंसुलिन रेजिस्टेंस’; डॉक्टर कुणाल सूद से जानें शरीर में दिखने वाले ये 6 गंभीर संकेत

टाइप-2 डायबिटीज का कारण बन सकता है ‘इंसुलिन रेजिस्टेंस’; डॉक्टर कुणाल सूद से जानें शरीर में दिखने वाले ये 6 गंभीर संकेत

नई दिल्ली: आजकल की अव्यवस्थित जीवनशैली और गलत खान-पान की वजह से इंसुलिन रेजिस्टेंस तेजी से बढ़ती एक मेटाबॉलिक समस्या बन चुकी है। इसमें शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति सही प्रतिक्रिया नहीं देतीं, जिससे खून में ग्लूकोज और इंसुलिन का स्तर बढ़ने लगता है। समय रहते अगर इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज और हृदय रोगों का रूप ले सकती है।

डबल बोर्ड-सर्टिफाइड एनेस्थिसियोलॉजिस्ट और इंटरवेंशनल पेन मेडिसिन फिजिशियन डॉक्टर कुणाल सूद ने इंसुलिन रेजिस्टेंस के 6 ऐसे लक्षणों के बारे में चेतावनी दी है, जिन्हें लोग अक्सर सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं:

 इंसुलिन रेजिस्टेंस के 6 मुख्य लक्षण

पेट के निचले हिस्से में चर्बी (Belly Fat) बढ़ना

इंसुलिन का स्तर अधिक होने से शरीर अतिरिक्त ऊर्जा को वसा (Fat) के रूप में जमा करने लगता है, खासकर पेट के आसपास। यह फैट आगे चलकर शरीर में अंदरूनी सूजन बढ़ाता है और टाइप-2 डायबिटीज व दिल की बीमारियों का जोखिम बढ़ा देता है।

त्वचा की सिलवटों का काला पड़ना (Acanthosis Nigricans)

गर्दन, बगल (Underarms) या जांघों के बीच की त्वचा पर काले, मोटे और मखमली पैच बनना इसका एक बड़ा संकेत है। ऐसा खून में बढ़ा हुआ इंसुलिन त्वचा की कोशिकाओं में ग्रोथ फैक्टर्स को उत्तेजित करने के कारण होता है।

खाना खाने के तुरंत बाद बहुत थकान महसूस होना

यदि खाना खाने के बाद आपको तेज सुस्ती, चिड़चिड़ापन या अचानक एनर्जी में गिरावट महसूस होती है, तो यह इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत हो सकता है। जब कोशिकाएं भोजन से ऊर्जा अवशोषित नहीं कर पातीं, तो शरीर सुस्त पड़ जाता है।

मीठे और कार्ब्स (Carbs) की बार-बार क्रेविंग होना

इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण ब्लड शुगर का स्तर तेजी से घटता-बढ़ता रहता है। खाने के बाद इंसुलिन का स्तर अचानक बढ़ने से जब शुगर गिरता है, तो शरीर एनर्जी बैलेंस करने के लिए बार-बार मीठा या स्टार्चयुक्त भोजन खाने की तीव्र इच्छा (Craving) पैदा करता है।

शरीर पर छोटे-छोटे ‘स्किन टैग’ (Skin Tags) निकलना

त्वचा पर अचानक छोटे-छोटे मस्से या स्किन टैग्स का बढ़ना भी इसका एक मुख्य कारण है। लंबे समय तक इंसुलिन का बढ़ा हुआ स्तर ग्रोथ फैक्टर की तरह काम करता है, जिससे त्वचा में अवांछित कोशिकाओं की वृद्धि होती है।

 बार-बार तेज प्यास लगना और पेशाब आना

जब खून में ग्लूकोज का स्तर अधिक रहता है, तो किडनियां अतिरिक्त शुगर को पेशाब के जरिए बाहर निकालने का प्रयास करती हैं। इस प्रक्रिया में शरीर के टिश्यूज से पानी खिंच जाता है, जिससे डिहाइड्रेशन होता है और व्यक्ति को बार-बार प्यास लगती है।टाइप-2 डायबिटीज का कारण बन सकता है ‘इंसुलिन रेजिस्टेंस’; डॉक्टर कुणाल सूद से जानें शरीर में दिखने वाले ये 6 गंभीर संकेत

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