कटनी के कैमोर में 10 लाख टन ज़हरीले एस्बेस्टस कचरे को हटाने की पहल शुरू: भोपाल लैब भेजी जाएगी मिट्टी और भूजल की सैंपल रिपोर्ट
विशेष रिपोर्ट : मध्यप्रदेश के कटनी जिले स्थित औद्योगिक क्षेत्र कैमोर में ब्रिटिश शासनकाल की एस्बेस्टस फैक्ट्री द्वारा छोड़े गए खतरनाक और ज़हरीले कचरे से स्थानीय निवासियों को निजात दिलाने की दिशा में बड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है। जनस्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर आशीष तिवारी द्वारा गठित संयुक्त टीम ने बुधवार को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर निरीक्षण किया तथा मिट्टी और भूजल के सैंपल एकत्र किए।
जनस्वास्थ्य सुरक्षा के लिए संयुक्त टीम का ग्राउंड एक्शन
अखबार ‘नईदुनिया’ में लगातार प्रकाशित खबरों और स्थानीय नागरिकों की स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों का संज्ञान लेते हुए प्रशासन हरकत में आया। संयुक्त टीम में शामिल अधिकारियों ने भटिया मोहल्ला (वार्ड क्रमांक-2) सहित प्रभावित इलाकों का जायजा लिया:
नमूने एकत्र किए गए: मिट्टी की गुणवत्ता जांचने के लिए फुटबॉल ग्राउंड और शासकीय अस्पताल के पीछे से सैंपल लिए गए।
भूजल परीक्षण: क्षेत्र के दो हैंडपंपों से पेयजल व भूजल के नमूने एकत्र किए गए।
वैज्ञानिक जांच: सभी सैंपल्स को परीक्षण और रासायनिक विश्लेषण के लिए केंद्रीय प्रयोगशाला, भोपाल (Central Lab Bhopal) भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कचरे को सुरक्षित रूप से हटाने और निस्तारण की अगली कार्ययोजना तैयार होगी।
1933 से जमा है 10 लाख टन जानलेवा एस्बेस्टस
कैमोर में भारत की पहली एस्बेस्टस सीट बनाने वाली फैक्ट्री वर्ष 1933 में ब्रिटिश कंपनी ‘टर्नर एंड नेवाल’ द्वारा स्थापित की गई थी।
1934 से 1989 तक लावारिस फेंका कचरा: कंपनी ने दशकों तक संचालन के दौरान निकलने वाले एस्बेस्टस कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण करने के बजाय उसे खुले मैदानों, ट्रेंचों और रिहायशी इलाकों के पास डंप कर दिया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठा मुद्दा: कैमोर में फैले इस ज़हरीले प्रदूषण का मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जेनेवा (Geneva) तक में गूँज चुका है।
5.62 लाख वर्ग मीटर प्रभावित: कनाडाई पर्यावरण परामर्श संस्था की 2016 की रिपोर्ट के अनुसार, यहाँ लगभग 5.62 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र सतही एस्बेस्टस प्रदूषण से प्रभावित है, जहाँ करीब 10 लाख टन ज़हरीला कचरा जमा है।कटनी के कैमोर में 10 लाख टन ज़हरीले एस्बेस्टस कचरे को हटाने की पहल शुरू: भोपाल लैब भेजी जाएगी मिट्टी और भूजल की सैंपल रिपोर्ट
मुआवजा: अब तक एस्बेस्टस के कारण गंभीर बीमारियों की चपेट में आए लगभग 1,000 प्रभावितों को कंपनी के ट्रस्ट द्वारा मुआवजा भी दिया जा चुका है।
नियमानुसार कैसे होना चाहिए कचरे का निष्पादन?
विशेषज्ञों के अनुसार, एस्बेस्टस (Asbestos) एक ऐसा जानलेवा तत्व है जो सालों तक नष्ट नहीं होता। इसके महीन कण सांस के जरिए फेफड़ों में जाकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं।
मानक प्रक्रिया: नियमानुसार एस्बेस्टस कचरे का निष्पादन करने के लिए कम से कम 10 फीट गहरा गड्ढा बनाकर कचरा डाला जाता है और ऊपर से 3 से 4 फीट मोटी कंक्रीट/सीमेंट की ठोस परत चढ़ाई जाती है ताकि इसके कण हवा या पानी में न घुल सकें।
संयुक्त टीम द्वारा पंचनामा तैयार कर लिया गया है और भोपाल लैब की रिपोर्ट आते ही डंप कचरे को सुरक्षित रूप से हटाने की वैधानिक प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी।

















