भारत की ‘सिल्क सिटी’ भागलपुर: जानिए क्यों दुनिया भर में मशहूर है बिहार का यह टसर सिल्क और क्या है इसका सदियों पुराना इतिहास
यशभारत वेब डेस्क: भारत में परिधानों और कपड़ों का एक बेहद समृद्ध इतिहास रहा है। देश का हर कोना अपनी अनूठी बुनाई कला, कढ़ाई और डिजाइनों के लिए जाना जाता है। इसी कड़ी में बिहार का भागलपुर शहर कपड़ा उद्योग की दुनिया में एक अनमोल रत्न की तरह चमकता है। गंगा नदी के दक्षिणी तट पर बसे इस शहर को भारत की ‘सिल्क सिटी’ (Silk City) कहा जाता है। आइए जानते हैं कि आखिर भागलपुरी सिल्क इतना खास क्यों है और कैसे यह सदियों से भारतीय हस्तशिल्प की पहचान बना हुआ है।
क्यों खास और अलग है भागलपुरी टसर सिल्क?
सिल्क के हर रेशे की अपनी अलग बनावट और पहचान होती है। भागलपुर मुख्य रूप से अपने टसर (Tussar) सिल्क के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
सामान्य शहतूत (Mulberry) सिल्क के विपरीत, टसर सिल्क के कीड़े जंगल के पेड़ों पर पलते हैं।इसका प्राकृतिक रंग मिट्टी जैसा या हल्का सुनहरा होता है। इसकी हल्की खुरदुरी बनावट इसे बाजार में मिलने वाले अन्य चिकने सिल्क से बिल्कुल अलग और आकर्षक लुक देती है। भागलपुरी सिल्क का उपयोग सिर्फ पारंपरिक साड़ियों और ड्रेस मटेरियल में ही नहीं, बल्कि स्कार्फ, स्टोल और होम फर्निशिंग के सामान बनाने में भी बड़े पैमाने पर किया जाता है।
सदियों पुराना इतिहास और औपनिवेशिक काल
भागलपुर का सिल्क व्यापार से रिश्ता कोई नया नहीं है। पीढ़ियों से बुनकर परिवार इस पारंपरिक कला को जीवित रखे हुए हैं स्कॉटिश चिकित्सक फ्रांसिस बुकानन-हैमिल्टन ने 1810-11 में भागलपुर के सर्वेक्षण के दौरान यहाँ के समृद्ध टसर सिल्क उद्योग का पहली बार लिखित दस्तावेजीकरण किया था।ब्रिटिश काल (बंगाल प्रेसीडेंसी) के दौरान भागलपुरी सिल्क भारत से बाहर भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने लगा था।
2013 में मिला GI टैग, चुनौतियों के बीच भी बरकरार है चमक
भागलपुरी सिल्क की विशिष्टता और क्षेत्रीय पहचान को देखते हुए वर्ष 2013 में इसे ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (GI Tag) प्रदान किया गया। आज पावरलूम और आधुनिक प्रतिस्पर्धा के दौर में पारंपरिक बुनकरों के सामने कई आर्थिक चुनौतियां हैं, लेकिन स्थानीय कारीगरों के समर्पण के बल पर यह ऐतिहासिक शिल्प आज भी देश-विदेश के बड़े फैशन हाउस और लग्जरी ब्रांड्स के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

