भारत का मास्टरस्ट्रोक: ग्लोबल क्राइसिस के बीच ईंधन संकट से बचाव, भारत ने कैसे संभाली तेल सप्लाई? जानिए पूरी रणनीति। खाड़ी देशों में तनाव और वैश्विक भू-राजनीतिक संकट के बीच दुनिया भर में कच्चे तेल की आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है, लेकिन भारत ने अपनी मजबूत कूटनीति और रणनीतिक खरीद नीति से स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित रखा है।
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भारत का मास्टरस्ट्रोक: ग्लोबल क्राइसिस के बीच ईंधन संकट से बचाव, भारत ने कैसे संभाली तेल सप्लाई? जानिए पूरी रणनीति
वैश्विक संकट का असर, लेकिन भारत सुरक्षित
हॉर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल आपूर्ति प्रभावित होने के बाद कई देशों में ईंधन संकट की स्थिति बन गई है। लेकिन भारत, जो दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है, ने समय रहते वैकल्पिक स्रोतों से सप्लाई सुनिश्चित कर ली।
रूस बना सबसे बड़ा सप्लायर
- भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ाया
- मार्च में लगभग 1.98 मिलियन बैरल प्रतिदिन आयात दर्ज किया गया
- अप्रैल डिलीवरी के लिए अतिरिक्त 60 मिलियन बैरल की डील
यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से भी बढ़ी सप्लाई
भारत ने सप्लाई को विविध बनाने के लिए:अंगोला से आयात तीन गुना बढ़ायाईरान और वेनेजुएला से भी पुनः सप्लाई शुरू कीनाइजीरिया और अन्य देशों से अतिरिक्त खरीदारी की, इससे भारत किसी एक क्षेत्र पर निर्भर नहीं रहा।
आम जनता को महंगाई से राहत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद:
- भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखी गईं
- एक्साइज ड्यूटी में कटौती से असर कम किया गया
- सरकार का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में कीमतों को नियंत्रित रखा गया है भारत ने ऊर्जा संकट के इस दौर में विविध सप्लाई रणनीति और कूटनीतिक संतुलन के जरिए अपने तेल आयात को सुरक्षित रखा है। इसका सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिल रहा है, जिन्हें फिलहाल वैश्विक महंगाई का पूरा असर नहीं झेलना पड़ रहा है।
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