ट्रंप के दबाव के आगे नहीं झुका भारत: अमेरिका ने रूसी तेल पर प्रतिबंधों की छूट 17 जून तक बढ़ाई; भारत बोला- ‘हमारा फैसला कमर्शियल, बाहरी दबाव मंजूर नहीं। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच वैश्विक तेल बाजार और कूटनीति के मोर्चे पर एक बहुत बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से व्यापार पूरी तरह बंद करने के चौतरफा दबाव के बावजूद, अमेरिका को आखिरकार पीछे हटना पड़ा है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने सोमवार को एक आधिकारिक आदेश जारी कर समुद्री परिवहन के जरिए आने वाले रूसी कच्चे तेल पर पाबंदियों से दी गई छूट की अवधि को एक और महीने के लिए बढ़ाकर 17 जून 2026 तक कर दिया है।
दिलचस्प बात यह है कि इस अमेरिकी फैसले से ठीक एक दिन पहले भारत ने वाशिंगटन को कड़े शब्दों में अपने इरादे साफ कर दिए थे कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगा।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने जारी किया ‘सामान्य लाइसेंस 134C
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) द्वारा सोमवार को जारी आदेश में कहा गया है कि 18 मई 2026 से प्रभावी नया ‘सामान्य लाइसेंस संख्या 134C’, पुराने लाइसेंस (134B) की जगह लेगा। इसके तहत 17 अप्रैल या उससे पहले समुद्र में फंसे रूसी तेल के परिवहन और खरीद पर पाबंदियों से मिली छूट अब 17 जून तक जारी रहेगी।
गौरतलब है कि अमेरिका इस छूट को लगातार एक-एक महीने के लिए बढ़ा रहा है। इससे पहले मार्च और अप्रैल में भी इसे बढ़ाया गया था। हालांकि, अमेरिका ने साफ किया है कि इस छूट के दायरे में ईरान, उत्तर कोरिया, क्यूबा या यूक्रेन के रूसी कब्जे वाले हिस्सों से जुड़ा कोई भी लेन-देन मान्य नहीं होगा।
अमेरिकी छूट पर निर्भर नहीं भारत की तेल खरीद- पेट्रोलियम मंत्रालय
इसी बीच, नई दिल्ली ने अमेरिकी प्रतिबंधों की परवाह न करते हुए रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखने का अपना संप्रभु स्टैंड दोहराया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक बेहद कड़ा और स्पष्ट बयान देते हुए कहा:
भारत सरकार का रुख: “भारत द्वारा की जा रही रूसी तेल की खरीद कभी भी अमेरिकी छूट (US Waivers) पर निर्भर नहीं रही है। भारत एक संप्रभु राष्ट्र है और कच्चे तेल की खरीद का हमारा फैसला पूरी तरह से देश की व्यावसायिक जरूरतों, व्यापारिक फायदे और देशवासियों की ऊर्जा सुरक्षा पर आधारित है। तेल बाजार में कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है और हमारी रिफाइनरियां किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”
डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों को भारत ने दिखाया आईना
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार भारत सहित दुनिया के अन्य देशों पर रूस के साथ हर तरह के व्यापारिक संबंध तोड़ने का भारी दबाव बना रहे हैं। ट्रंप प्रशासन की ओर से लगातार प्रतिबंधों की धमकियां भी दी जा रही हैं।
इसके बावजूद, भारत ने यह साफ संकेत दे दिया है कि वह ऊर्जा सुरक्षा के मामले में किसी भी महाशक्ति के दबाव में नहीं आएगा। भारत का यह कड़ा स्टैंड दुनिया को यह संदेश है कि भारत की विदेश और आर्थिक नीति पूरी तरह से स्वतंत्र है और वह अपने आर्थिक हितों को सर्वोपरि रखेगा। ट्रंप के दबाव के आगे नहीं झुका भारत: अमेरिका ने रूसी तेल पर प्रतिबंधों की छूट 17 जून तक बढ़ाई; भारत बोला- ‘हमारा फैसला कमर्शियल, बाहरी दबाव मंजूर नहीं

