50% से कम रहा बोर्ड रिजल्ट तो रुकेगी इंक्रीमेंट: मप्र स्कूल शिक्षा विभाग का कड़ा आदेश, प्राचार्य और शिक्षकों पर तय होगी जवाबदेही
ग्वालियर। तीन महीने बाद शुरू होने वाली बोर्ड परीक्षाओं को लेकर लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने सरकारी स्कूलों के प्रति सख्त रुख अपनाया है। विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यदि किसी सरकारी स्कूल का 10वीं या 12वीं की बोर्ड परीक्षा का परिणाम 50 प्रतिशत से कम रहता है, तो संबंधित स्कूल के प्राचार्य और विषय शिक्षकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। ऐसे शिक्षकों व प्राचार्यों की न केवल वेतनवृद्धि (इंक्रीमेंट) रोकी जाएगी, बल्कि अन्य विभागीय कार्रवाइयों का सामना भी करना पड़ सकता है।
आदेश से शिक्षकों और प्राचार्यों में हड़कंप शिक्षा विभाग के इस सख्त आदेश के बाद ग्वालियर जिले के स्कूलों के प्राचार्यों और शिक्षकों में हलचल तेज हो गई है। हालांकि, पिछले वर्षों के रिकॉर्ड को देखें तो 30 से 35 प्रतिशत परिणाम देने वाले स्कूलों के प्राचार्यों को केवल कारण बताओ नोटिस जारी कर औपचारिकता पूरी कर ली गई थी, जिसके बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लेकिन इस बार विभाग के कड़े तेवरों से हड़कंप मचा हुआ है।
शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने की कवायद सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर बेहतर करने के उद्देश्य से लोक शिक्षण विभाग लगातार सख्त कदम उठा रहा है। ई-अटेंडेंस के जरिए शिक्षकों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के बाद अब सीधे परीक्षा परिणाम से जवाबदेही तय की जा रही है।
ग्वालियर जिले में बीते वर्षों के बोर्ड रिजल्ट की स्थिति:
शैक्षणिक सत्र 2024-25: जिले का 10वीं का रिजल्ट 72.45% और 12वीं का 61.93% रहा था। इस सत्र में करीब 30 स्कूलों का प्रदर्शन बेहद खराब रहा, जहां महज 30% छात्र ही पास हो सके।
शैक्षणिक सत्र 2025-26: जिले में 10वीं का रिजल्ट 65.95% और 12वीं का 71.39% दर्ज किया गया। इस सत्र में भी लगभग 25 स्कूलों का परिणाम 30% के आसपास ही सिमट कर रह गया था।
पहले केवल नोटिस, इस बार सीधे सख्त कार्रवाई बीते वर्षों में खराब रिजल्ट वाले स्कूलों के प्राचार्यों व शिक्षकों को प्रशासन और शिक्षा विभाग द्वारा समीक्षा के बाद कारण बताओ नोटिस दिए गए थे। शिक्षकों द्वारा दिए गए जवाबों के बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। लेकिन इस बार विभाग ने साफ कर दिया है कि संतोषजनक जवाब न मिलने और 50 प्रतिशत से कम परिणाम रहने पर वेतनवृद्धि रोकने जैसी दंडात्मक कार्रवाई निश्चित तौर पर की जाएगी।











